वर्चस्व को यूपी में लेकर आईएएस और आईपीएस अफसरों में तनी.

योगी सरकार

वर्चस्व को यूपी में लेकर आईएएस और आईपीएस अफसरों में तनी. प्रदेश में आईएएस और आईपीएस अफसरों के बीच छिड़ी अहम की लड़ाई बढ़ती जा रही है। आईपीएस अफसरों का कहना है कि आईएएस उन्हें दोयम दर्जे का समझते हैं और इसे खत्म किया जाना चाहिए। आईपीएस एसोसिएशन सचिव ने प्रदेश में चल रहे आईएएस वीक में पत्र लिखकर आईएएस अफसरो को नसीहत दी है कि सामंती प्रोटोकॉल को खत्म कर समान भाव के साथ काम किया जाए।

जिले में डीएम के क्राइम मीटिंग के विवाद में अभी यूपी नौकरशाही उलझी ही थी कि आईएएस और आईपीएस एक और मुद्दे पर आमने सामने है। आईपीएस एसोसिएशन सचिव असीम अरूण ने दो पेज का  पत्र आईएएस एसोसिएशन के सचिव को लिखा है। दोनों संवर्ग में सामंजस्य के लिए उन्होंने चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखकर सुझाव भी दिए हैं।

असीम अरुण ने याद दिलाया कि सरकार अगर वीआईपी कल्चर खत्म कर रही है। तो आईएएस अफसरों को सामंती प्रोटोकाल खत्म करना चाहिए। मीटिंग में कौन ऊंची कुर्सी पर बैठा कौन बाएं बैठा। वहीं किसकी गाड़ी पहले निकली, फोन पर कौन पहले आया जैसे मुद्दों पर नौकरशाही अपनी उर्जा व्यर्थ करती है। समता, समावेश और आदर के भाव के साथ काम करने का माहौल बनाया जाये। अपने इस पत्र ने जरिये आईपीएस ने आईएएस अफसरों को खुद को बड़ा ना समझने की नसीहत दी है।

आईएएस और आईपीएस अफसरों के अधिकारों को लेकर मचे रार पर रिटायर आईएएस एसएन शुक्ल ने खेद जताते हुए कहा है कि किसी भी संवर्ग के दबाव में निर्णय नहीं होना चाहिए। जिस शासनादेश को लेकर डीजीपी और आईपीएस एसोसिएशन द्वारा विरोध किया जा रहा है, उसे उचित नहीं कहा जाएगा।

पूर्व डीजीपी एके जैन ने कहा कि पुलिस को पुलिस का काम करना चाहिये। उसके काम में दखलंदाजी कम की जाये। जिन राज्यों में कमिश्नर सिस्टम लागू कर पुलिस को ताकतवर बनाया गया। वहां अपराध नियंत्रण अपने आप में उदाहरण है।

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