बिहार में गठबंधन सरकार में पड़ने लगी हैं दरारें

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बिहार में गठबंधन सरकार में पड़ने लगी हैं दरारें. जदयू ने कांग्रेस से कहा है कि वह गठबंधन को कमजोर करने वाला कोई काम न करे। इशारे इशारे में भाजपा और जदयू की ओर से यह भी संकेत दे दिया गया कि दोनों दल प्राकृतिक रूप से एक दूसरे के ज्यादा करीब थे। राष्ट्रपति चुनाव को लेकर गरमाई राजनीति की आंच अब गठबंधन पर साफ दिखाई देने लगी है।

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राजद के साथ ही कांग्रेस के रवैए ने जदयू को भड़का दिया है। यही कारण है कि मंगलवार को जदयू महासचिव केसी त्यागी ने सख्त लहजे में कांग्रेस को आगाह कर दिया। उन्होंने कहा, ‘मुङो नहीं पता कि कांग्रेस महागठबंधन की जिंदगी क्यों कम कर रही है। जब हम राजग में थे तो प्राकृतिक रूप से करीब थे लेकिन विचारधारा के आधार पर अलग हुए।’ गौरतलब है कि एक दिन पहले कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने राजग के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने के मुद्दे पर नीतीश कुमार पर तंज किया था। उन्होंने कहा था कि जिनकी एक विचारधारा होती है वह एक फैसला लेते हैं, जिनकी कई विचारधाराएं होती हैं वह अलग अलग फैसला लेते हैं।

जाहिर तौर पर जदयू को यह नागवार गुजरा है। हालांकि त्यागी ने भाजपा के साथ फिर से हाथ मिलाने की अटकलों को नकार दिया। लेकिन जानकारों का मानना है कि राजद और कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी ने जदयू को तिलमिला दिया है। नीतीश कुमार ने पहले ही राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के आरोपों का दो टूक जवाब दिया था। लेकिन बार बार यह सिलसिला चलता रहा तो हमला और तीखा होगा।

जाहिर है कि आपसी घमासान का शिकार गठबंधन होगा। यह अटकल इसलिए भी तेज हो गई है क्योंकि जदयू के वार के तत्काल बाद भाजपा ने भी इसी सुर में नीतीश की प्रशंसा की। पार्टी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक दूसरे के प्रति आदर का हवाला देते हुए कहा कि महागठबंधन बच भी जाए तो अंदरूनी खींचतान में प्रभावी नहीं रह जाएगी।

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