प्रेग्नेंट स्टूडेंट्स को मिली बड़ी राहत

प्रेग्नेंट स्टूडेंट्स

प्रेग्नेंट स्टूडेंट्स को मिली बड़ी राहत। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके लिए पढ़ाई के दौरान कॉलेज और स्कूलों में उपस्थिति की अनिवार्यता खत्म कर दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है और इसी तरह के एक मामले में मातृत्व अवकाश के चलते कालेज में 80 प्रतिशत उपस्थिति न दर्ज करा पाने वाली छात्रा को छूट का हकदार माना है और छात्रा को परीक्षा में बैठने देने का आदेश दिया है।
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महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कालेज झांसी में डॉ. आबरीन अख्तर एनेस्थीसियोलॉजी डिप्लोमा कोर्स कर रही हैं। गर्भवती होने के कारण प्रथम वर्ष में वह 63.93 फीसदी ही उपस्थिति दर्ज करा सकी। हालांकि दूसरे वर्ष में उनकी उपस्थिति 94.64 प्रतिशत रही। लेकिन जब परीक्षा की तिथि आयी तो कालेज प्रशासन ने आबरीन की परीक्षा फीस जमा करने से इन्कार करते हुये परीक्षा में बैठने से रोक दिया।

आगामी 15 जून को परीक्षा थी और परीक्षा से पहले आबरीन को बड़ा झटका दिया गया। कालेज प्रशासन की ओर से बताया गया कि 80 प्रतिशत उपस्थिति न दर्ज करा पाने के कारण वह परीक्षा नहीं दे सकती । आबरीन ने अपनी प्रेग्नेंसी की दलीलें दी। लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार आबरीन ने हाईकोर्ट की शरण ली। जहां से उसे राहत दी गई और अब आबरीन परीक्षा दे सकेगी ।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति मुख्तार अहमद की खण्डपीठ ने शुरू की तो कोर्ट को बताया गया कि भारतीय चिकित्सा परिषद ने नियम बनाया कि मेडिकल छात्रों की 80 फीसदी उपस्थिति होनी चाहिये। ऐसे में आबरीन को बिना पूर्ण उपस्थिति के कैसे परीक्षा में बैठने दिया जाये। यह नियमों का उल्लंघन होगा।

डबल बेंच ने इस दलील को पहली ही नजर में नकार दिया और कहाकि भारतीय चिकित्सा परिषद का यह नियम निर्देशात्मक है, बाध्यकारी नहीं । न्यायालय ने कहा है कि यह मातृत्व अवकाश के दायरे में आता है। जो पूर्व में ही स्वीकृत है। साथ ही यह विशेष परिस्थितिजन्य विषय है। विशेष परिस्थिति में तो छूट दी जा सकती है। उच्च न्यायालय ने आबरीन की फीस तत्काल जमाकर उसे परीक्षा में बैठने देने का आदेश दिया है।

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