लखनऊ। एक्शन में योगी, नौकरशाहों के हाथ पांव फूले

उत्तर प्रदेश सरकार

एक्शन में योगी आदित्यनाथ, नौकरशाहों के हाथ पांव फूले.यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक्शन आ जाने के कारण नौकरशाह सकते हैं. लिहाजा यूपी के नौकरशाहों में खलबली मची हुई है. आंकड़ों को देखा जाए तो अपने डेढ़ महीने के कार्यकाल में योगी ने अहम फैसले लिए हैं लेकिन महज चार दिनों के दौरान योगी ने 50 से ज्यादा अफसरों को तलब कर नौकरशाही में खलबली मचा दी है.

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चाहे वह कोई जिला हो, पुलिस विभाग हो, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग हो या नगर निगम, विकास प्राधिकरण, सीएम योगी जन सुनवाई को लेकर ढिलाई के लिए किसी भी अफसर को बख्शते नहीं दिख रहे हैं. सीएम ने 6 जून से 10 जून तक चार दिन में ही प्रदेश के 50 प्रमुख अफसरों से स्पष्टीकरण तलब कर लिए गए हैं.

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अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का ये सिलसिला पिछली 6 जून को शुरू हुआ, जब सीएम योगी ने जन शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण में सबसे ज्यादा खराब प्रदर्शन करने वाले 10 जनपदों के डीएम से स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए.
यही नहीं इसी क्रम में सीएम ने 10 जिलों के एसएसपी का भी जवाब-तलब किए जाने के भी निर्देश दिए. दरअसल लोक-शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा के दौरान इन जिलों में लापरवाही सामने आने के बाद सीएम ने अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किए जाने का फैसला लिया.

 

जन-शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण में सर्वाधिक खराब प्रदर्शन करने वाले 10 जिलों में राजधानी लखनऊ के साथ हरदोई, गौतमबुद्ध नगर, कानपुर नगर, गोरखपुर, इलाहाबाद, सीतापुर, आगरा, जौनपुर और खीरी के डीएम कटघरे में खड़े हुए. वहीं राजधानी लखनऊ के साथ हरदोई, गोरखपुर, खीरी, सीतापुर, बहराइच, जौनपुर, इलाहाबाद, फिरोजाबाद तथा मैनपुरी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों का जवाब-तलब किए जाने के निर्देश दिए हैं.
9 जून को सीएम ने जन शिकायतों में कोताही बरतने के लिए 10 वरिष्ठ अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांग लिए. इनमें बेसिक शिक्षा परिषद, इलाहाबाद के सचिव, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, निदेशक बेसिक शिक्षा, निदेशक माध्यमिक शिक्षा, निदेशक समाज कल्याण, निदेशक पंचायती राज, अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा (इलाहाबाद), अपर निदेशक बेसिक शिक्षा (इलाहाबाद), प्रमुख अभियन्ता लोक निर्माण विभाग और प्रमुख अभियन्ता सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग शामिल हैं.

इसके साथ ही 10 विकास प्राधिकारणों के तहत लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर, सहारनपुर, झांसी, मेरठ, आगरा, इलाहाबाद, गोरखपुर और नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्षों से क्लीरिफिकेश मांगा गया और इसके बाद गाजियाबाद, कानपुर, गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी, झांसी, आगरा, बरेली, इलाहाबाद तथा सहारनपुर नगर निगमों के नगर आयुक्तों से जवाब-तलब किए जाने के निर्देश दिए हैं.

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