समाजवादी पौष्टिक आहार योजना पर लग सकता है ग्रहण.

समाजवादी पौष्टिक आहार योजना पर लग सकता है ग्रहण. यूपी में समाजवादी पार्टी की पूर्व सरकार द्वारा शुरू की गयी एक और
योजना को योगी सरकार बंद करने की तैयारी में है। लिहाजा मध्यान्ह भोजन
प्राधिकरण की ओर से अब तक फल वितरण के लिए बजट न मिलने के कारण समाजवादी
पौष्टिक आहार योजना ग्रहण लग सकता है। राज्य सरकार पहले भी समाजवादी
पार्टी की सरकार के कई योजनाओं को बंद कर चुकी है।
इस योजना को चला रहे एनजीओ संचालकों का कहना है कि मार्च से अब तक फल
वितरण के लिए धन का भुगतान नहीं किया गया है। ऐसे में ज्यादा दिनों तक
फलों का वितरण नहीं किया जा सकता है। पिछले साल तत्कालीन समाजवादी पार्टी
की सरकार ने सरकारी विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को मौसमी
फल दिए जाने के लिए समाजवादी पौष्टिक आहार योजना की शुरुआत की थी। पिछले
साल जुलाई माह में शुरू हुई इस योजना के तहत स्कूलों में प्रत्येक सोमवार
को कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को मिड-डे-मील से पहले एक-एक मौसमी फल
केला, नाशपाती, आम, संतरा दिए जाने की व्यवस्था की गयी थी।
राज्य के परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे-मील व फल वितरण की व्यवस्था
एनजीओ को दी गयी है, कुछ स्थानों में ग्राम प्रधान हेड मास्टर के साथ
मिड-डे-मील का वितरण करते हैं। इसी तरह नगर क्षेत्र के राजकीय, सहायता
प्राप्त व मदरसों में मिड-डे-मील में फल देने की जिम्मेदारी स्वयं सेवी
संस्थाओं के पास है। बजट न होने के कारण स्वयं सेवी संस्थाओं ने हाथ खड़े
कर दिए हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है पहले वर्ष फल वितरण के लिए लगभग
दो सौ करोड़ रपए का बजट जारी किया गया था। इसके बाद वर्ष 2017-18 के लिए
भी बजट स्वीकृत किया गया, लेकिन बाद में बजट वापस ले लिया गया। इससे
सितम्बर में परिषदीय विद्यालयों से लेकर राजकीय, सहायता प्राप्त व मदरसों
में पढ़ने वाले बच्चों को फलों का वितरण बंद कर दिया गया और अब इस योजना
के बारे में शासन को फैसला लेना है

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