लोकतंत्र के महाकुंभ का सफल आयोजन-चंचल कुमार तिवारी व टीम

लोकतंत्र के महाकुंभ का सफल आयोजन-चंचल कुमार तिवारी व टीम

उत्तर प्रदेश राजनैतिक तौर पर देश का सबसे बड़ा राज्य ही नहीं बल्कि लोकतंत्र की पहली दहलीज कहे जाने वाले ग्राम पंचायतों के लिहाज से सबसे बड़ा राज्य है 2015-2016 में राज्य में पंचायत चुनाव संपन्न हुए। एक तरह से यह विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव है और अगर यूं कहें कि यह लोकतंत्र का महाकुंभ था तो कहना गलत नहीं होगा। हालांकि चुनाव कराने का जिम्मा राज्य निर्वाचन आयोग का होता है, लेकिन इसको अमली जामा पहनाया राज्य के पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव चंचल कुमार तिवारी और उनकी टीम ने। पंचायत चुनाव के लिए पंचायतों की सूची बनाना, नए पंचायतों का गठन करना और वर्गों में विभाजित करना आसान नहीं था। क्योंकि पंचायत चुनाव 2010 के बाद चुनाव 2015 में होने तय थे। इसके साथ ही 1995 के बाद ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन किया जाना था। असल में 73वें संविधान सशोधन के लागू होने के बाद 1995 में लगभग 1000 की आबादी पर ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन किया गया था। इसके बाद करीब 20 सालों के बाद पूरे प्रदेश में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन कराने का फैसला किया गया और अगस्त, 2014 से ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन के कार्य को शुरू कर दिसम्बर, 2014 में पूरा हुआ।
चंचल कुमार तिवारी अपनी टीम के साथइस दौरान पंचायतों के पुनर्गठन के बाद प्रदेश में ग्राम पंचायतों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ और जो ग्राम पंचायत 1995 में 51,914 थी वह 2014 में बढ़कर 59,073 हो गयी। यानी प्रदेश में 7,159 नई ग्राम पंचायतों का गठन हुआ। यानी 7159 गांवों को विकास के लिए एक और माध्यम मिला। चंचल तिवारी और उनकी टीम रोज पुनर्गठन के कामों की मॉनीटरिंग करती और जहां पर पुनर्गठन का काम धीरे चल रहा था वहां पर उसका समाधान कर समस्याओं का निराकरण करती ताकि तय समय में पूरा पुनर्गठन हो जाए।
ग्राम पंचायत का पुनर्गठन तो पहला पड़ाव था अभी तक कई और काम बाकी थे। ग्राम पंचायत के पुनर्गठन के बाद फरवरी, 2015 से मई, 2015 तक त्रिस्तरीय पंचायतों के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का कार्य किया गया और इसके बाद प्रदेश में ग्राम पंचायतों में 7,42,073 वार्ड, क्षेत्र पंचायतों में 77,769 वार्ड तथा जिला पंचायतों में 3,122 वार्डो का गठन हुआ। असल में केंद्र सरकार हर 10 वर्ष के दौरान जनगणना कराती है। साल 2001 की जनगणना के बाद 2005 में पंचायतों के सामान्य निर्वाचन से पूर्व ग्रामीण क्षेत्रों में पिछडे़ वर्ग के व्यक्तियों की गणना के लिए रैपिड सर्वे कराया गया था। लेकिन 10 साल हो चुके थे और इस बीच जनसंख्या में भी इजाफा हो चुका था। लिहाजा 10 साल के बाद 2015 में मई, 2015 से अगस्त, 2015 के बीच रैपिड सर्वे कराया गया। जिसके बाद राज्य में पिछड़े वर्ग के व्यक्तियों की जनसंख्या 8.43 करोड (55.33 प्रतिशत) निर्धारित हुई। इसके बाद अगस्त विभाग ने पंचायतों में पदों और स्थानों के लिए आरक्षण व आवंटन के कार्य को 2015 कर नवम्बर, 2015 तक पूरा किया और पूरी रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयुक्त को सौंपी और उसके बाद राज्य में पंचायत चुनाव संपन्न हुए। इन चुनाव प्रदेश की आधी आबादी यानी महिलाओं ने इतिहास रचा। प्रदेश के 74 जिला पंचायत अध्यक्ष के पदों में महिलाओं की हिस्सेदारी 59.5 फीसदी रही जबकि पुरूषों की हिस्सेदारी 40.5 फीसदी। यानी 74 में 44 पदों पर महिलाओं ने और 30 पदों पर पुरूष निर्वाचित हुए। जबकि जिला पंचायत सदस्य के पदों में महिलाओं की हिस्सेदारी 45.3 फीसदी तो पुरूषों की हिस्सेदारी 54.7 फीसदी रही तो वहीं ग्राम पंचायत सदस्य के पदों पर महिलाओं की 42.3 फीसदी और पुरूषों की हिस्सेदारी 57.7 फीसदी रही। पूरे राज्य में 737989 ग्राम पंचायत सदस्यों का चुनाव हुआ। जो अपने आप में एक इतिहास है।
बैठक लेते हुए प्रमुख सचिव चंचल कुमार तिवारी राज्य में पंचायत चुनाव के लिए प्राथमिक स्तर पर की गयी तैयारियों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रमुख सचिव चंचल तिवारी और टीम के साथ ही जिलों के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक व पंचायत राज्य अधिकारियों को सम्मानित किया।

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