खास बातचीत- जायका से बढ़ा है राज्य का वन क्षेत्र-एसके उपाध्याय

 खास बातचीत- जायका से बढ़ा है राज्य का वन क्षेत्र-एसके उपाध्याय
उत्तर प्रदेश में जायका का प्रोजेक्ट 2009 से चल रहा है। इसके कारण राज्य का वन क्षेत्र बढ़ा है। अब यह प्रोजेक्ट 2017 में खत्म हो रहा है। आगे की रणनीति के लिए जायका उत्तर प्रदेश के सीईओ एसके उपाध्याय से खास बातचीत…
राज्य में जायका प्रोजेक्ट अब अगले साल खत्म होने वाला है। इसकी उपलब्धियों को आप किस तरह से देखते हैं।
उत्तर प्रदेश में जायका प्रोजेक्ट 2009 से चल रहा है और इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि ये रही है कि राज्य में वन क्षेत्र में इजाफा हुआ है। स्थानीय लोगों की भागीदारी से करीब 60 हजार हेक्टेयर में पौधे रोपे गए हैं और इसका परिणाम सबसे सामने है।
जायका का मूल उद्देश्य क्या है।
जापानी क्रेडिट एजेंसी विभिन्न प्रोजेक्ट के लिए धन मुहैया कराती है। प्रदेश में कम होते वन क्षेत्र को बढ़ाने के लिए जायका के नाम का प्रोजेक्ट शुरू किया गया। इसका मूल उद्देश्य स्थानीय लोगों की मदद से वन क्षेत्र को बढ़ाना और स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है।
राज्य में जायका के प्रोजेक्ट कहां कहां चल रहा हैं।
राज्य में जायका के प्रोजेक्ट 14 जिलों और 20 डिवीजनों में चल रहे हैं। इसमें तराई, विध्न, रेनूकूट, बुंदेलखंड के जिले शामिल हैं।
जायका का कुल कितना बजट राज्य में खर्च किया गया है।
जायका के पहले चरण के लिए केंद्र से 468 करोड़ रूपये का बजट था और इसके सापेक्ष 107 करोड़ रूपये राज्य सरकार था। इसकी तुलना में अभी तक448 करोड़ रूपये खर्च किए जा चुके हैं।
कुछ साल पहले जायका को भ्रष्टाचार की शिकायतें मिली थी।
जी हां शिकायतें मिली थी और इसकी जांच भी की गयी। जांच में कुछ कर्मचारी दोषी पाए गए थे। उनके खिलाफ कार्यवाही की जा चुकी है। उसके बाद अभी तक और शिकायतें नहीं मिली हैं। मैं आपको बताना चाहूंगा कि जायका का मॉनिटरिंग सिस्टम ऐसा है कि इसमें भ्रष्टाचार की गुंजाइश ही नहीं है। क्योंकि स्थानीय लोगों के साथ ही एनजीओ भी जुड़े हैं। साथ जायका स्वयं इस प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग करती है।
देश के कई राज्यों में जायका का प्रोजेक्ट अपने दूसरे चरण में शुरू हो गया है। दूसरे चरण के लिए आपकी क्या तैयारियां चल रही हैं।
राज्य में 2017 में प्रोजेक्ट का पहला चरण खत्म होगा। पहले यह 2016 में खत्म हो रहा था। हम लोगों की कोशिश है कि 2017 के अंत तक हमें दूसरे चरण के लिए जायका से मदद मिले। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार की तरफ से दूसरे चरण के लिए 980 करोड़ रूपये का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है और वहां से यह अभी नीति आयोग भेजा गया है। वहां से वित्त मंत्रालय को इसे भेजा जाएगा। हमें उम्मीद है कि राज्य में इसका दूसरा चरण शुरू होगा। मैं स्वयं इसकी निगरानी कर रहा हूं। जायका इंडिया के प्रमुख से हम लोगों की बातचीत हो गयी है। उन्होंने भी प्रदेश में दूसरा चरण शुरू करने में अपनी दिलचस्पी जताई है।
जायका के दूसरे चरण के लिए क्या खास प्रस्ताव में इसमें शामिल किए गये हैं।
दूसरे चरण के लिए एग्रो फारेस्ट्री को इसमें शामिल किया है। जो सबसे अलग है। किसानों को इससे जोड़ने की पहल की जाएगी। इससे एक तरफ उनकी आय बढ़ेगी साथ खेती के अलावा उनके पास आय का दूसरा जरिया होगा। यह सब गैर वन विभाग की जमीन पर होगा। जिस तरह से पहले चरण में 8 सौ मैनेजमेंट कमेटी 2680 सेल्फहेल्प ग्रुप बनाए गए हैं। दूसरे चरण में किसानों के भी ग्रुप तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा दूसरे चरण में मौजूदा चरण में शामिल जिलों के अलावा 16 अन्य जिलों को भी शामिल किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश जायका के प्रोजेक्ट को काफी सराहा गया है।
जी हां, प्रदेश के प्रोजेक्ट को जायका की टीम ने काफी सराहा है। पिछले दिनों गंगटोक में हुए सेमिनार में जायका ने राज्य में बढ़े वन क्षेत्र की तारीफ की है। प्रदेश के साथ ही तमिलनाडू व राजस्थान जायका की भी प्रशंसा की गयी है।

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