Akhilesh Yadav's Mission UP-2022:यूपी फतह को अखिलेश यादव बना रहे हैं मेगा प्लान, प्लान ए और बी भी बनेंगे

Mission 2022 in UP:समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश अगस्त से अपने चुनावी अभियान शुरू कर सकते हैं। अखिलेश यादव को पूरे प्रदेश को कवर करने में दो महीने लगेंगे और पार्टी जल्दबाजी नहीं करना चाहती।

Akhilesh Yadav's Mission UP-2022:यूपी फतह को अखिलेश यादव बना रहे हैं मेगा प्लान, प्लान ए और बी भी बनेंगे

Mission 2022 in UP: उत्तर प्रदेश में 2022 में विधानसभा चुनाव (Assembly elections) होने वाले हैं। पूर्व में प्रदेश पर शासन करने वाली समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) एक बार फिर इसके लिए जोर लगा रही है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (party chief akhilesh yadav) भी अपना ज्यादातर समय पार्टी कार्यालय में बिता रहे हैं। लगातार पार्टी नेताओं और संभावित उम्मीदवारों के साथ बैठकें कर रहे हैं। 2022 का चुनाव यादव के जीवन की सबसे बड़ी राजनीतिक लड़ाई (big political battle) कहा जा सकता है। अगर मौजूदा हालात को देखा जाए तो 2017 के चुनाव की तुलना में यादव के पक्ष में कई बातें सामने आ रही हैं।  

पहले की ही तरह की एकता पार्टी में वापस आ रही हैं। चाचा शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) 2017 की तरह पार्टी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। दूसरा, बहुजन समाज पार्टी आंतरिक परेशानियों (internal troubles) से जूझ रही है। इस दौरान सपा मुस्लिमों को यह संकेत देने पर विचार कर रही है कि बीएसपी बीजेपी को हराने की स्थिति में नहीं है। तीसरा, अखिलेश खेमे के एक नेता ने कहा, यूपी में बीजेपी की ठाकुरवाद़ की राजनीति के साथ-साथ कोविड-19 की स्थिति को संभालने को लेकर चल रहे गुस्से का इस्तेमाल करने की सोच रहे हैं।

अखिलेश ने 2017 में काम बोलता है के नारे के साथ विकास मॉडल (development model) को बढ़ावा दिया, लेकिन अब वह इस बात पर ध्यान केंद्रित करेंगे कि सीएम योगी आदित्यनाथ कोई बड़ी विकास परियोजना नहीं पहुंचा सके। अखिलेश ने छोटे दलों के साथ मिलकर गठबंधन के साथ अपनी ताकत से काम करने और जातिगत समीकरणों (caste equations) को संरेखित करने का फैसला किया है। पार्टी को लगता है कि 2019 में सपा (SP) को वोट देने वाले बीएसपी (BSP) के महत्वपूर्ण वोटर 2022 में फिर से एसपी के साथ आ सकते हैं।

क्या दिल्ली की मीडिया अखिलेश को कर रहा है फ्लॉप साबित?

अखिलेश खेमा लगातार कह रहा हैं कि दिल्ली मीडिया (Delhi Media) उन्हें एक आलसी राजनेता (lazy politician) के रूप में दिखा रहा है जो कभी बाहर नहीं जाता और घर पर रहता है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक सपा नेता ने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो सपा पंचायत चुनाव (Panchayat Election) में इतना अच्छा प्रदर्शन कैसे करेगी? अखिलेश ने पिछले महीनों में किसान यात्रा और साइकिल यात्रा निकाली है, जिसमें 40 जिले शामिल हैं। लेकिन मीडिया ने इसे ठीक से कवर नहीं किया और कहा कि वे दिखाई नहीं दे रहे हैं।

पार्टी के एक नेता ने कहा कि अखिलेश अगस्त से अभियान की शुरुआत कर धीरे-धीरे इसे तेज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश को पूरे प्रदेश को कवर करने में दो महीने लगेंगे और पार्टी जल्दबाजी नहीं करना चाहती। वे साइकिल, कार और हेलिकॉप्टरों (Bicycles, Cars and Choppers) में प्रचार कर सकते हैं, लेकिन भाजपा साइकिल पर अभियान नहीं कर सकती । यह हमारी यूएसपी है।

सपा को सत्ता में वापसी की उम्मीद

अखिलेश खेमे में कई अच्छे संकेत देखने को मिल रहे हैं। पहला यह कि चाचा शिवपाल सिंह यादव जंग (War) के मूड में कम हैं और अखिलेश सिंह को सपा में पार्टी में विलय के लिए नहीं कह रहे हैं। पिछले हफ्ते एक इंटरव्यू (Interview) के दौरान अखिलेश ने यह भी कहा था कि वह शिवपाल की पार्टी के साथ काम करेंगे और जसवंतनगर और उनके खिलाफ कुछ करीबी साथियों के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेंगे। सपा के एक नेता ने संभावना जताई कि अगर पार्टी जीतती है तो शिवपाल को मंत्री बनाया जा सकता है और उनके कुछ विधायकों को भी जगह दी जा सकती है। उन्होंने कहा, उन्हें एहसास हो गया है कि मतदाता कह रहे हैं कि चाचा की लड़ाई काफी है, अब यह बड़ी लड़ाई बीजेपी के साथ है।

सपा भाजपा में चल रही तकरार पर विचार कर रही है और पिछले चुनाव में एक साथ आए सामाजिक गठबंधन (social alliance) इस बार अच्छे संकेत के रूप में प्रभावी नहीं है। एक नेता ने कहा, पिछले चुनावों में बीजेपी के पास सीएम पद के लिए पांच चेहरे थे, लेकिन इस बार उनके पास सिर्फ एक चेहरा (योगी आदित्यनाथ) है। उन्हें अपनी छवि और कार्यक्षमता को बचाना होगा। सपा को लगता है कि भाजपा में अन्य जातियों का कैडर कमतर महसूस कर रहा है। ऐसी स्थिति में कुछ सपा के साथ आ सकते हैं, क्योंकि बीजेपी (BJP) के पास करीब 320 विधायक हैं, जो उन्हें टिकट के जरिए खुश कर सकते हैं।

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प्रदेश में अफसरशाही (bureaucracy) को लेकर भी माहौल बना हुआ है। एक नेता ने कहा कि कैसे जेल में बंद सपा नेता आजम खान को अपने खर्चे पर मेदांता अस्पताल में भर्ती कराने की अनुमति मिल गई। जबकि, जेल के नियमों में साफ है कि कैदी का इलाज सिर्फ सरकारी अस्पताल में ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा,  चुनाव नजदीक आने के साथ ही नौकरशाह भी विपक्ष के प्रति जवाबदेह हो गए हैं ।

सपा को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा

हालांकि सपा (SP) के सामने अभी भी बड़ी चुनौती पिछले शासन काल में कानून व्यवस्था (Law and order) की खराब स्थिति थी। इस दौरान सांप्रदायिक और भ्रष्टाचार से जुड़े कई मुद्दे देखने को मिले, जिस पर बीजेपी ने जांच शुरू की। योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है और यूपी में संगठित अपराध पर नकेल कसने का दावा किया गया है । फिलहाल यह साफ है कि 2022 में प्रदेश में बीजेपी और सपा के बीच हॉर्स रेस  है, जहां दोनों को एक-दूसरे पर नजर रखे हुए है।