BJP's Mission 2022: कांग्रेस ही नहीं सपा और बसपा में भी सेंधमारी की तैयारी में भाजपा, वक्त का करें इंतजार

BJP's Mission 2022: जितिन के बाद अन्य कांग्रेसी भी कतार में बताए जा रहे हैं। सूत्रों से पता चलता है कि कांग्रेस के कई और नेता भी भाजपा के संपर्क में हैं। इनमें दो विधायक भी हैं। कानपुर के एक कांग्रेस नेता के भाजपा में शामिल होने की भी अटकलें हैं।

BJP's Mission 2022: कांग्रेस ही नहीं सपा और बसपा में भी सेंधमारी की तैयारी में भाजपा, वक्त का करें इंतजार

BJP's Mission 2022:  भाजपा में पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद (Former Union Minister Jitin Prasada in BJP) की रवानगी के कारण यूपी की राजनीति में भगदड़ का बवंडर और बढ़ेगा। बीजेपी (BJP) चुनाव से ठीक पहले इस संकेत को साफ करने की कोशिश कर रही है कि वह पहले से ज्यादा मजबूत है, क्योंकि चुनाव के समय लोग मजबूत के पाले में आते हैं। सूत्रों से पता चलता है कि कांग्रेस के कई और नेता भी भाजपा के संपर्क में हैं। इनमें दो विधायक भी हैं।

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly elections) से पहले भाजपा विपक्ष की ताकत को कमजोर करने की दिशा में आगे बढ़ी है। सभी विपक्षी दल (opposition party) निशाने पर हैं। सूत्रों से पता चलता है कि कांग्रेस के सात विधायकों में से अदिति सिंह और राकेश सिंह जाहिरा तौर पर भाजपा के साथ हैं। बाकी पांच विधायकों (five legislators) में से तीन ऐसे हैं, जो दूसरे दलों में अपनी जगह तलाश रहे हैं। इनमें से दो बीजेपी के संपर्क में हैं और सही समय का इंतजार कर रहे हैं।

पूर्वाचंल में मजबूत कांग्रेसी भी भाजपा की पसंद

इसके अलावा कांग्रेस के पूर्वांचल (Purvanchal) के एक मजबूत नेता भी बीजेपी के करीबी हो रहे हैं। हालांकि उनकी रवानगी का सही समय तय नहीं हो पाया है।इसके साथ ही कानपुर के एक कांग्रेस नेता (Congress leader) के भाजपा में शामिल होने की काफी अटकलें लगाई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि वह पिछले विधानसभा चुनाव में ही भाजपा में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे। अब जितिन के बीजेपी में जाने के बाद उन्हें भी यह मौका अनुकूल दिख रहा है।

सपा-बसपा में भी अच्छे नहीं हालात

कहा जा रहा है कि कांग्रेस ही नहीं बल्कि सपा और बसपा भी बीजेपी के निशाने पर (SP and BSP are also on the target of BJP) हैं।दरअसल, बीजेपी चाहती है कि विपक्ष चुनावी परिसर में आने से पहले भी सार्वजनिक रूप से इस सवाल का जवाब दे कि अगर वे सत्ता के दावेदार हैं तो फिर बीजेपी में उनके कामरेड क्यों? राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि बसपा के ज्यादातर विधायक अब उनके अपने नहीं हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई सपा और कुछ भाजपा के संपर्क में हैं। हाल ही में बसपा से दरकिनार किए गए दो नेताओं में से एक का भाजपा में शामिल होना लगभग तय है। सूत्रों से पता चलता है कि सपा में भी तोडफ़ोड़ के कुछ प्रयास शुरू हो गए हैं।

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डील के पीछे की वजह

जितिन के बीजेपी में शामिल होने के बाद अब उस डील को राजनीतिक हलकों में तलाशा जा रहा है, जिसके बाद जितिन ने बीजेपी (BJP) में शामिल होने का फैसला किया। सूत्रों का दावा है कि जितिन को मंत्री पद और विधान परिषद में सदस्य (Ministerial posts and members in the Legislative Council) के रूप में यूपी की राजनीति में लाया जाएगा । जिस तरह से मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा हो रही है, उसे देखते हुए अटकलें और मजबूत हो रही हैं।