Chief Secretary Transfer Dispute:पीएम-सीएम के बीच फंसे सीएस अलपन, क्या हैं ऐसे नियम, जिनके तहत बुला सकता है केन्द्र ?

Chief Secretary Transfer Dispute: राज्य में इस बैठक को लेकर राजनीति शुरू हुई थी कि रात में केन्द्र सरकार ने एक आदेश जारी किया। जिसके तहत अलपन बंदोपाध्याय (Alapan Bandopadhyay) को केन्द्र सरकार को दिल्ली में रिपोर्ट करने को कहा।

Chief Secretary Transfer Dispute:पीएम-सीएम के बीच फंसे सीएस अलपन, क्या हैं ऐसे नियम, जिनके तहत बुला सकता है केन्द्र ?

Chief Secretary Transfer Dispute: पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी अलपन बंदोपाध्याय (Alapan Bandopadhyay) को केन्द्र सरकार द्वारा बुलाए जाने को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। केन्द्र सरकार ने अलपन बंधोप्धयाय (Alapan Bandopadhyay)  को दिल्ली में रिपोर्ट करने को कहा है। लेकिन भारत के इतिहास में शायद पहली बार हो रहा है जब किसी रिटायर होने वाले चीफ सेक्रेटरी को राज्य की सेवाओं को समाप्त कर केन्द्र सरकार बुला रही है।

लेकिन अब सवाल ये उठता है कि क्या केन्द्र सरकार के पास ऐसे शक्तियां हैं? जिसका इस्तेमाल कर वह किसी भी राज्य में सेवाएं दे रहे अफसर को सेंट्रल डेपुटेशन (Central deputation) में बुला सकता है। जबकि भारतीय प्रशासनिक सेवा का अफसर महज चार दिनों के बाद रिटायर होने वाला हो और केन्द्र सरकार ने अफसर को तीन महीने का एक्सटेंशन दिया हो।

शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान बैठक में राज्य के चीफ सेक्रेटरी अलपन बंदोपाध्याय (Alapan Bandopadhyay) गायब थे। यही नहीं बैठक में राज्य की सीएम ममता बनर्जी भी मौजूद नहीं थी और वहीं उन्होंने पीएम मोदी को बैठक के लिए आधे घंटे का इंतजार किया। राज्य में इस बैठक को लेकर राजनीति शुरू हुई थी कि रात में केन्द्र सरकार ने एक आदेश जारी किया।

जिसके तहत अलपन बंदोपाध्याय (Alapan Bandopadhyay)  को केन्द्र सरकार को दिल्ली में रिपोर्ट करने को कहा। इसमें केन्द्र सरकार ने लिखा कि उनकी सेवाएं केन्द्र सरकार को ट्रांसफर की जा रही है और 31 मई को दस बजे तक डीओपीटी (DOPT) में रिपोर्ट करें।

फिलहाल अलपन बंदोपाध्याय (Alapan Bandopadhyay)  को लेकर सियासत शुरू हो गई हैं। क्योंकि अलपन बंदोपाध्याय (Alapan Bandopadhyay)  31 मई को ही रिटायर हो रहे हैं और महज कुछ दिनों पहले ही केन्द्र सरकार ने उन्हें तीन महीने के एक्सटेंशन दिया है। केन्द्र में सचिव रह चुके यूपी कैडर के 1978 बैच के आईएएस अफसर सुधीर कुमार की कहना है कि "फिलहाल ये समझ से परे कि केन्द्र सरकार ने किन नियमों के तहत अलपन बंधोप्धयाय (Alapan Bandopadhyay) को सेंट्रल डेपुटेशन (Central deputation) में बुलाया है। जबकि वह रिटायर होने वाले थे और केन्द्र सरकार ने ही उन्हें तीन महीने का एक्सटेंशन दिया। क्योंकि सेंट्रल डेपुटेशन (Central deputation)  के लिए नियम कुछ और कहते हैं और केन्द्र में डेपुटेशन में बुलाने के लिए केन्द्र सरकार के अपने नियम हैं। जो उनका पालन करता है। केन्द्र सरकार उन्हें सेंट्रल डेपुटेशन (Central deputation)  में नियुक्त करती है।" 

फिलहाल केन्द्र और राज्य के बीच चल रही इस सियासत में अलपन बंदोपाध्याय (Alapan Bandopadhyay)  एक मोहरा बन गए हैं। हालांकि अगर वह केन्द्र में रिपोर्ट नहीं करते हैं तो उनको कोई नुकसान नहीं होगा। क्योंकि वर्तमान में वह राज्य में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये जरूर हो सकता है कि केन्द्र सरकार उनके तीन महीने के एक्सटेंशन पीरियड के लिए दिए गए आदेश को रद्द कर दे। अगर केन्द्र ऐसा करता है तो उनके पास कोर्ट जाने का विकल्प होगा और वह रिटायर भी हो जाते हैं तो राज्य सरकार उन्हें अहम पदों पर नियुक्त कर सकती है। 

केन्द्र में किसे मिलता है डेपुटेशन। इसके लिए क्या कहते हैं नियम

1- केन्द्र में प्रतिनियुक्ति के लिए अफसर के पास कम से कम एक साल रिटायरमेंट का समय होना चाहिए। इससे कम समय में केन्द्र में किसी को डेपुटेशन नहीं मिलता है। यहां तक कि केन्द्र में सेवाएं दे रहे अफसर, जिनका समय एक साल से कम है। उन्हें सेक्रेटरी के पद पर नियुक्त नहीं किया जाता है। उन्हें सेक्रेटरी के समकक्ष के पद या स्पेशल सेक्रेटरी के पद पर नियुक्ति किया जाता है। जिन अफसरों का रिटायरमेंट का समय एक साल से कम है, केन्द्र सरकार उन्हें डेपुटेशन (Central deputation)  के लिए एंपेनल नहीं करता है।

2-किसी भी अफसर को सेंट्रल डेपुटेशन के लिए ज्वाइंट सेक्रटरी पद तक का पूर्व में कार्य करने का अनुभव होना चाहिए। मसलन अगर कोई अफसर केन्द्र में ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद पर डेपुटेशन में आता है, तो उसके पास ज्वाइंट सेक्रेटरी के नीचे के पद यानी निदेशक के पद तक का डेपुटेशन (Central deputation)  में कार्य करने का अनुभव होना चाहिए।

3-केन्द्र सरकार में उन्हीं अफसरों को डेपुटेशन (Central deputation)  में कार्य करने का मौका मिलता है। जिनका किसी पद पर एंपेनलमेंट हुआ हो। इसके बगैर केन्द्र में किसी अफसर को डेपुटेशन में कार्य करने का मौका नहीं मिलता है। इसके लिए अफसर को सेंट्रल डेपुटेशन में जाने से पहले राज्य सरकार से अनुमति लेनी होती है। कई मामलों में राज्य सरकार अफसर को रिलीव नहीं करती है और केन्द्र से अफसर को डेपुटेशन से डिबार न करने का अनुरोध करती है। अगर केन्द्र सरकार किसी अफसर को सेंट्रल डेपुटेशन से डिबार करती है तो वह तीन साल की अवधि में सेंट्रल डेपुटेशन में नहीं जा सकता है।

क्या अलपन बंदोपाध्याय ने डेपुटेशन के लिए किया था अप्लाई?

असल में अलपन बंदोपाध्याय (Alapan Bandopadhyay)  ने सेंट्रल डेपुटेशन (Central deputation) के लिए अप्लाई नहीं किया था? क्योंकि वह 31 मई को रिटायर होने वाले थे और राज्य सरकार ने केन्द्र को उनके तीन महीने का एक्सटेंशन देने की अनुमति देने को कहा था। जिसे केन्द्र सरकार ने मंजूर कर लिया था। तो फिर केन्द्र सरकार किन नियमों के तहत अलपन बंदोपाध्याय को केन्द्र सरकार को रिपोर्ट करने को कह रही है।

जानें कौन हैं अलपन बंधोप्धयाय 

बंगाल के चीफ सेक्रेटरी अलपन बंधोप्धयाय (Alapan Bandopadhyay) कभी सेंट्रल डेपुटेशन (Central deputation)  पर नहीं गए और उन्होंने अपनी सेवाएं राज्य सरकार को ही दी। वह राज्य में कई अहम पदों पर रहे। लेकिन रिटायर होने से पहले विवादो में आ गए हैं। अलपन बंधोप्धयाय 1987 बैच के अफसर हैं और वर्तमान में राज्य के चीफ सेक्रेटरी हैं।