Corona Warriors: कोरोना संक्रमितों के बने मददगार, एक हजार मरीजों को एंबुलेंस से पहुंचा चुके हैं अस्पताल

Corona Warriors: अब इन युवाओं के पास तीन गाड़ियां हैं। इनको एंबुलेंस के रूप उपयोग किया जा रहा है। इनमें दो कारें प्रतिमाह 40 हजार रपये किराये पर ली गई हैं। इसका भुगतान आपसी सहयोग से दिया जाता है।

Corona Warriors: कोरोना संक्रमितों के बने मददगार, एक हजार मरीजों को एंबुलेंस से पहुंचा चुके हैं अस्पताल

Corona Warriors: छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर में कोरोना ने शादियों पर ग्रहण भले लगाया, मगर वेडिंग कारपोरेशन कंपनी’ संचालित करने वाले चार दोस्तों की व्यस्तता में कमी नहीं आई है। लोगों को एंबुलेंस और आक्सीजन के लिए भटकते देख चारों तन, मन और धन से सेवा में लग गए हैं। सबसे पहले अपने पिता माहेश्वरी समाज के प्रदेश अध्यक्ष विठ्ठल दास भूतड़ा से प्रेरित प्रवीण भूतड़ा ने अपनी कार को कोरोना पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सेवा में समर्पित कर दिया। जिनकी आज पूरे शहर में तारीफ हो रही है।

फिर अन्य साथियों के सहयोग से दो और कारें किराये पर लेकर ड्राइवर रख लिए हैं तथा पिछले दो महीने में एक हजार लोगों को अस्पताल पहुंचा चुके हैं। इसके बाद उनको लोगों का सहयोग भी मिलने लगा है। वे अब तक सात लाख रपये कोरोना पीड़ितों पर खर्च कर चुके हैं। इसमें 200 आक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था और 1000 मरीजों को दुर्ग—भिलाई और रायपुर के अस्पतालों में इलाज के लिए मुफ्त पहुंचाना शामिल है। अब इन युवाओं के पास तीन गाड़ियां हैं। इनको एंबुलेंस के रूप उपयोग किया जा रहा है।

इनमें दो कारें प्रतिमाह 40 हजार रपये किराये पर ली गई हैं। इसका भुगतान आपसी सहयोग से दिया जाता है। इसी तरह से स्वयं के पास उपलब्ध पैसों एवं समाज के सहयोग से अबतक सात लाख पये कोरोना पीड़ितों के लिए इन युवाओं ने खर्च कर दिये हैं। दुर्ग निवासी प्रवीण भूतड़ा की एक द वे¨डग कारपोरेशन कंपनी है। जिसका संचालन चार दोस्त मिलकर करते हैं। इसके अलावा भूतड़ा शादी, पार्टी या अन्य समारोह के लिए टेंट की दुकान संचालित करते हैं। 

आज वे कोरोना संक्रमण की चपेट में आए मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। वे कोरोना मरीजों को आक्सीजन उपलब्ध करा रहे हैं। प्रवीण ने बताया कि उनके पिता विठ्ठल दास भूतड़ा छत्तीसगढ़ प्रादेशिक माहेश्वरी सभी के अध्यक्ष रहे हैं। वे हर माह करीब 20 गरीबों की मदद करते थे। वे ही मेरे लिए प्रेरणा बने। पिछले साल कोरोना काल में बड़े भाई के मार्गदर्शन में जरूरतमंदों को सहयोग किया था। उस समय पांच आक्सीजन कंसेट्रेटर मशीन खरीदे और उसे मरीजों की सेवा में लगा दिया।

इस बार अपने दोस्तो के साथ मिलकर 20 नए आक्सीजन कंसेट्रेटर मशीन खरीदा और उसे मरीजों की सेवा में लगा दिया है।अपनी और दोस्तों की कार को बनाया एंबुलेंस: प्रवीण बताते हैं कि जब आक्सीजन मशीन संचालित कर रहे थे, उस दौरान पड़ोसी का फोन आया कि एंबुलेंस की जरूरत है। एंबुलेंस के लिए काल किया तो चंदूलाल चंद्राकर कोविड केयर सेंटर ले जाने के लिए चार हजार रपये मांगे गए, जबकि 500 रपये किराया है।

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इसके बाद उन्होंने सोचा क्यों न मरीजों के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की जाए, फिर उन्होंने अपनी एक कार और दो कार किराये पर लेकर उसको एंबुलेंस का रूप देकर तीनों गाड़ियों को एंबुलेंस में तब्दील करवा दिया। इन एंबुलेंस में करीब 30 हजार रपये का डीजल भरवाया गया है। इसके अलावा इन तीन ड्राइवरों को पांच—पांच हजार रपये प्रतिमाह दिया जा रहा है।