Damage control in Rajasthan Congress: यूपी में जितिन ने की बगावत और ताकत बढ़ेगी सचिन पायलट की राजस्थान में

Damage control in Rajasthan Congress: सचिन पायलट के प्रति पार्टी हाईकमान के नजरिए को समझने के बाद अब यह बात सामने आई है कि गहलोत तेजी से मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद में जुटे हैं।

Damage control in Rajasthan Congress: यूपी में जितिन ने की बगावत और ताकत बढ़ेगी सचिन पायलट की राजस्थान में

Damage control in Rajasthan Congress: कांग्रेस पार्टी में असंतोष और आपसी तकरार (mutual dispute) को नियंत्रित (controlled) करने के लिए अब राजस्थान में तैयारियां शुरू हो गई हैं।

सचिन पायलट (Sachin Pilot) के प्रति पार्टी हाईकमान के नजरिए (high command perspective) को समझने के बाद अब यह बात सामने आई है कि गहलोत तेजी से मंत्रिमंडल विस्तार (cabinet expansion) की कवायद में जुटे हैं।

बताया जा रहा है कि गहलोत के करीबी धर्मेंद्र राठोड़ ने पायलट गुट के विश्वेंद्र सिंह से मुलाकात की है। वह सचिन के करीबी नेताओं के संपर्क में हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक (According to media reports), इससे पहले वह पायलट, विधायक पीआर के करीबी थे। 
 
पायलट खेमे को फिर से मिल सकती है ताकत

सूत्रों की मानें तो सचिन पायलट खेमे (Sachin Pilot camp) के 3 से 4 विधायकों को मंत्री बनाकर शीत युद्ध को खत्म करने की कोशिश हो सकती है।

मंत्रिमंडल विस्तार (cabinet expansion) के साथ ही पायलट समर्थकों को जगह देकर पार्टी संगठन और विभिन्न आयोगों को भी फिर से विश्वास में लिया जा सकता है। जुलाई तक नई राजनीतिक नियुक्तियों (political appointments) के लिए मंत्रिमंडल विस्तार का पिटारा खुल सकता है।

इसलिए है असंतोष

विशेषज्ञों का कहना है कि क्योंकि गहलोत सरकार (Gehlot Sarkar) अगले कुछ महीनों बाद तीन साल पूरे कर लेगी। साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार सहित कई नियुक्तियां नहीं हुई हैं।

ऐसी स्थिति में पार्टी संगठन के कार्यकर्ताओं (party organization workers) सहित सत्ता में भी असंतोष है। ऐसी स्थिति में अब जल्द से जल्द इस संबंध में समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

पायलट खेमे ही नहीं, बल्कि निर्दलीयों का विरोध भी

जानकारों के मुताबिक गहलोत सरकार (Gehlot Sarkar) से मंत्रिमंडल विस्तार (cabinet expansion) और नियुक्तियों में कमी के कारण सरकार को पायलट खेमे (Sachin Pilot camp) के विरोध का सामना ही नहीं करना पड़ा है।

साथ ही राजनीतिक संकट के दौरान गहलोत के साथ खड़े निर्दलीय और बसपा विधायक भी इस बात को लेकर नाराज हैं कि सरकार अभी इस मुद्दे पर चुप है।

जितिन प्रसाद की रवानगी से भी बनी दहशत

यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस के दिग्गज युवा नेता जितिन प्रसाद (Congress veteran youth leader Jitin Prasad) के भाजपा में शामिल होने के बाद भी कांग्रेस में हलचल है। ऐसी स्थिति में अब कांग्रेस चाहती है कि पंजाब और राजस्थान के नेताओं का असंतोष (discontent) जल्द से जल्द काफी हद तक कम हो जाए।

विशेषज्ञों का कहना है कि पार्टी यूपी चुनाव से पहले पंजाब-राजस्थान के मुद्दे का हल निकालना चाहती है, जिसके लिए अब प्रयास तेज हो गए हैं। इसकी वजह यह भी है कि पार्टी की एक नई छवि इससे उभरकर सामने आनी चाहिए और इसका लाभ चुनावों में भी मिल सकता है।

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राजस्थान का चेयर मैनेजमेंट

गौरतलब है कि राजस्थान में 30 मंत्रियों का कोटा है, वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित 21 मंत्री हैं। ऐसी स्थिति में 9 और मंत्रियों को कुर्सी मिलने की संभावना है। ऐसे में अब सबसे ज्यादा संभावना उन नेताओं की है, जो पायलट खेमे से हैं और निर्दलीय हैं और बसपा छोडक़र कांग्रेस में शामिल हो गए थे।