Dent in BJP: घर वापसी के लिए ममता खोलेंगी दरवाजा, पांच साल में बीजेपी को कांग्रेस बनाने की होगी रणनीति

Dent in BJP: तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए भाजपा के इन मौजूदा नेताओं का प्यार जोरों पर है। सोनाली गुहा और सरला मुर्मू समेत कई नेता माफी मांगने वालों की कतार में हैं। लिहाजा भाजपा को राज्य में खत्म करने के लिए ममता घर वापसी के दरवाजे खोलने से गुरेज नहीं करेंगी।

Dent in BJP:  घर वापसी के लिए ममता खोलेंगी दरवाजा, पांच साल में बीजेपी को कांग्रेस बनाने की होगी रणनीति

Dent in BJP:  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोडऩे के बाद भाजपा में शामिल हुए टीएमसी के तीन नेताओं का भाजपा (BJP) से मोहभंग होने लगा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए भाजपा के इन मौजूदा नेताओं का प्यार जोरों पर है। सोनाली गुहा के बाद सरला मुर्मू और अब अमोल आचार्य ने एक पत्र लिखकर अपनी ममता प्रेम की जाहिर किया है। माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी भाजपा को कमजोर करने के लिए चुनाव से पहले पार्टी छोड़कर भाजपा में गए बागियों के लिए घर वापसी के लिए दरवाजे खोल सकती हैं। ताकि अगले पांच साल में भाजपा की स्थिति राज्य में कांग्रेस और वाम दलों की तरह हो जाए।

जो लोग ममता बनर्जी को करीब से जानते हैं, वह इस बात से परिचित हैं कि दीदी को गुस्सा बहुत आता है और वह अपनी जिद के लिए कुछ भी कर सकती हैं। लिहाजा बागियों के मन में दीदी को लेकर खौफ है। लिहाजा टीएमसी के बागी नेता अब गुहार लगा रहे हैं। सोनाली गुहा ने तो यहां तक कहा कि जैसे मछली पानी के बिना नहीं रह सकती, वैसे ही मैं तुम्हारे बिना नहीं रह पाऊंगी दीदी। सरला मुर्मू और अमोल आचार्य भी माफी मांगते (Apologise) हुए दीदी की शरण में आने को बेकरार हैं। यह भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं हो सकता है, तीन से 77 विधानसभा सीटों (दो सांसद बने विधायकों के इस्तीफे के बाद 75) तक पहुंच गई है।

भाजपा की बढ़ सकती है मुसीबत

अगर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) को अलग रखा जाए तो ममता बनर्जी का भवानीपुर सीट जीतने के बाद पश्चिम बंगाल में अगले 5 साल तक मुख्यमंत्री (Chief Minister) बनना निश्चित है। दो मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है और दलबदलुओं (Defectors)का ममता के प्रति प्यार बढ़ता जा रहा है। दीदी से माफी मांगने वालों को देखते हुए भविष्य में भाजपा विधायकों पर इस दीदी प्रेम के प्रभाव की संभावना काफी बढ़ गई है।

राजनीति में विरोधी पक्ष को हल्के में लेना हमेशा भारी होता है। ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने विधानसभा चुनाव में यह गलती नहीं की। विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने दलबदलुओं को गद्दार के रूप में पेश किया था। तृणमूल कांग्रेस भी अपने दांव में कामयाब रही। नतीजा यह हुआ कि टीएमसी के दलबदलुओं की एक बड़ी फौज में से सिर्फ 6 नेता ही जीते।

बंगाल का चुनावी इतिहास 

पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास (Electoral history) पर नजर डालें तो यह स्थिति बिल्कुल साफ लगती है। राज्य में पहला विधानसभा चुनाव जीतने से पहले और बाद में वाम दलों (Left parties) और कांग्रेस (Congress) के कई बड़े नेता ममता बनर्जी के पाले में खड़े हो गए। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इन नेताओं को अपने पक्ष में लाने के लिए साम-दाम-ढाक-भींडर के तमाम तरीके अपनाए थे। उस दौरान ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर राजनेताओं को फर्जी मामलों में फंसाने और पद के लालच में खुद को लिप्त करने का आरोप लगा था। 213 सीटें जीतने के बाद टीएमसी को ऑपरेशन ग्रास फ्लावर चलाने की जरूरत नहीं है, लेकिन पश्चिम बंगाल से भाजपा का जनाधार खत्म करने के लिहाज से यह काफी अहम लग रहा है।

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि टीएमसी (TMC) के रणनीतिकार ऑपरेशन ग्रास फ्लावर (Operation Grass Flower) पर मंथन नहीं करेंगे। इस समय बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार ऐसा होता भी देखा जा रहा है। टीएमसी भविष्य में भाजपा विधायकों को ऐसी ही राहत दे सकती है। बंगाल का चुनावी इतिहास इस बात का संकेत देता है। वैसे, ऑपरेशन ग्रास फ्लावर (Operation Grass Flower) में चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद भडक़ी हिंसा भी एक बड़ा फैक्टर साबित होगी। बंगाल के रक्त चरित्र ने हमेशा नेताओं की पार्टी को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है।

भाजपा में आ रहा है आंतरिक संकट

लोकसभा चुनाव 2019 में पश्चिम बंगाल की 18 सीटों पर भाजपा को जीतने वाले मुकुल रॉय दो दशक बाद चुनाव जीते थे। विधानसभा सदस्य पद की शपथ लेने के बाद मुकुल राय तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष से चर्चा करते और टीएमसी के कुछ नेताओं को बधाई देते नजर आए।

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ममता भाजपा को कमजोर करने का मौका नहीं छोड़ेंगी

विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता तथागत रॉय अपनी ही पार्टी के खिलाफ मुखर हो गए।  विधानसभा चुनाव के दौरान टीएमसी से भाजपा में शामिल हुए 150 बड़े नेताओं को लेकर पार्टी के भीतर नाराजगी साफ नजर आ रही है। वह पश्चिम बंगाल में भाजपा को कमजोर करने का शायद ही कोई मौका छोड़ेगी। टीएमसी के दलबदलुओं के बाद भाजपा विधायकों पर सीधा खतरा मंडराने लगेगा। खैर, भाजपा इस चुनौती से कैसे निपटेगी, यह तो वक्त ही बताएगा।