कविताओं के जरिए व्यक्त होती हैं भावनाएं-सुमिता मिश्रा, आईएएस व कवित्री

लाइफ ऑफ ए लाइट नाम की कविताओं संग्रह के बारे में सुमिता बताती हैं कि मैं बता दूं कि यह कविता संग्रह पूरी तरह से महिलाओं पर केन्द्रित नहीं है। इसमें जीवन के कई रूप हैं।

कविताओं के जरिए व्यक्त होती हैं भावनाएं-सुमिता मिश्रा, आईएएस व कवित्री

                                        कविताओं के जरिए व्यक्त होती हैं भावनाएं-सुमिता मिश्रा, आईएएस व कवित्री

माता-पिता दोनों डाक्टर। घर पर अकसर दवा, मरीज या फिर अस्तपाल से जुड़ी बातें। लेकिन इन सबके बाद सुमिता मिश्रा को कविताओं से लगाव था। सुमिता शुरूआत से ही स्कूल में होने वाली डिबेट, लेखन प्रतियोगिता में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती थी। लिहाजा साहित्य से लगाव बढ़ता गया। बचपन से ही बोलने में तेज थी। साहित्य के प्रति ये लगाव स्कूली दिनों से कॉलेज के दिनों तक जारी रहा। कमाल की बात है, उस वक्त साहित्यकार बनने का ख्वाब नहीं बल्कि आईएएस बनने का ख्बाब था और देश की सेवा करने का जज्बा था।

हालांकि कालेज के दिनों में साहित्य में रूचि दोस्तों को भी थी। लेकिन उस वक्त मध्यम परिवार में कैरियर के तौर पर स्पोर्टस और साहित्य को सकारात्मक नहीं लिया जाता था। पर खैर सरस्वती देवी की कृपा रही और सुमिता के प्रोफेशनल ख्वाब पूरे हुए।

लाइफ ऑफ ए लाइट नाम की कविताओं संग्रह के बारे में सुमिता बताती हैं कि मैं बता दूं कि यह कविता संग्रह पूरी तरह से महिलाओं पर केन्द्रित नहीं है। इसमें जीवन के कई रूप हैं। मेरा मानना है कि जीवन संगम की तरह है। इन कविताओं में कई तरह के रूप हैं,स्वर हैं और यात्रा है। मेरी कविताएं यहीं हैं। ये एक संवेदनशील मन की यात्रा है। जो मेरे स्वर हैं, अगर वह दूसरों के स्वरों में सुनाई  देंगे तो मेरी कविता सफल होगी। मैं मानती हूं कि कविता को थोड़ा सा सरल होना चाहिए। हरिवंश राय बच्चन, महादेवी वर्मा समेत कई महान कवियों की बात करें तो उनकी कविताओं में सरलता है और गूढ़ता है। 

मेरा मानना है कि दुनिया में पहली कविता प्रेम ही होगी। इस लिए कविता में प्रेम के साथ दर्शन आता है। मेरी कविताओं में इस तरह के अनुभव हैं, जो उत्प्रेरक के तौर पर कार्य करता है। आप देखते होंगे कि कई मुश्किलों के बाद हार होती या फिर जीत। या न्याय या फिर अन्याय। यह सब कविता का रूप हो सकता है। जो मानव जीवन से जुड़ा हुआ होता है। कविता दिव्य कृपा है अगर आप कुछ अलग सोचते हैं आप कविता का एक माध्यम हैं।

सुमिता ने आईएएस और कवित्री धीरा खंडेलवाल और चंद्रशेखर वर्मा के साथ मिलकर एक अन्य कविता संग्रह कदमों की लय भी लिखी। इस कविता संग्रह में तीनों की 15- 15 कविताएं हैं। हाल ही में सुमिता का अन्य नई कविता संग्रह लम्हों का सफर का प्रकाशित हुई है। आईएएस अफसर होने के नाते लिखने की आजादी के बारे में सुमिता कहती हैं कि कविताओं के जरिए अपनी भावनाओं को आसानी से अभिव्यक्त किया जा सकता है। सुमिता आजकल  अंग्रेजी में एक कविता संग्रह लिख रही हैं।