Former Minister Jagmohan passed away: जगमोहन के कड़क फैसलों में दिखती थी मुस्लिमों के अत्याचार की टीस

Former Minister Jagmohan passed away: कड़क मिजाज के माने जाने वाले जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल जगमोहन (Jagmohan ) का आज निधन हो गया है। उन्होंने कई कठोर फैसले लिए और आतंकवादियों के खिलाफ एक विशेष रणनीति अपनाई। जम्मू कश्मीर का राज्यपाल(Governor of Jammu and Kashmir) रहते हुए उन्होंने कश्मीरी पंडितों के अत्याचार रोकने की कोशिश की।

Former Minister Jagmohan passed away: जगमोहन के कड़क फैसलों में दिखती थी मुस्लिमों के अत्याचार की टीस

Former Minister Jagmohan passed away:  जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल जगमोहन (Jagmohan) मल्होत्रा ​​का आज निधन हो गया है। उन्होंने अपने कैरियर की शुरूआत नौकरशाह से शुरू की थी और राज्यपाल तक का सफर तय किया था। हालांकि उन्होंने चुनाव भी लड़ा। जगमोहन दिल्ली के एलजी भी रहे हैं और उन्हें आपातकाल के दौरान राजधानी के सौंदर्यीकरण का काम सौंपा गया था। वह आपातकाल के समय दिल्ली विकास प्राधिकरण डीडीए के अध्यक्ष (Delhi Development Authority DDA) भी थे। जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल रहते हुए, उन्होंने सख्त रवैया अपनाया था और घाटी में आतंकवाद को खत्म करने के लिए कड़े फैसले भी लिए। लेकिन इन सबके बावजूद पाकिस्तान में मुस्लिमों के अत्याचार की टीस हमेशा से ही उनके फैसलों में दिखी।

असल में जगमोहन (Jagmohan) मल्होत्रा ​​संजय गांधी के पसंदीदा अधिकारियों में गिने जाते थे। कहा जाता है कि आपातकाल के दौरान उन्हें संजय गांधी की ओर से बुलाया गया था और उन्होंने कहा था कि उन्हें एक दिल्ली में सुधार करने करने और दिल्ली को साफ सुथरा बनाना है। लिहाजा उन्होंने दिल्ली को आधुनिक दिल्ली बनाने की कोशिश की। 

जानकारी के मुताबिक जगमोहन (Jagmohan) का परिवार विभाजन के बाद दिल्ली में बस गया और पाकिस्तान में मुस्लिमों के अत्याचार की टीस उनके फैसलों और विचारों में हमेशा ही दिखती थी। उन्होंने कई अखबारों में लेख लिखे और जिसमें वह हिंदू राष्ट्रवाद (Hindu nationalism) के विषय पर लिखते थे। बताया जाता है कि जगमोहन ने एक बैठक में कहा था कि जामा मस्जिद के बीच में सब कुछ हटा दिया जाना चाहिए और मुझे दूसरा पाकिस्तान नहीं चाहिए। हालांकि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उन्हें ये करने की इजाजत नहीं दी।

राज्यपाल के तौर पर लिए थे कड़े फैसले

केन्द्र सरकार ने जगमोहन (Jagmohan) मल्होत्रा ​​को 1989 में केंद्र सरकार द्वारा जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया था और उस वक्त तत्कालीन गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद (Home Minister Mufti Mohammad Sayeed) की बेटी का अपहरण कर लिया गया था। जगमोहन मल्होत्रा ​​की नियुक्ति का विरोध करते हुए फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि इसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था और 6 वर्षों के लिए राष्ट्रपति शासन के अधीन रहा। राज्यपाल के पद पर रहते हुए जगमोहन (Jagmohan) ने कई कठोर फैसले लिए और आतंकवादियों के खिलाफ एक विशेष रणनीति अपनाई। कश्मीरी पंडितों ने भी अत्याचार रोकने की कोशिश की। जम्मू-कश्मीर के हालात पर केंद्र सरकार के रुख को देखते हुए उन्होंने इस मुद्दे पर राजीव गांधी को एक कड़ा पत्र भी लिखा।

पाकिस्तान के हाफिजाबाद में जन्मे थे जगमोहन

आज प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi ) ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया, इसे राष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया। वहीं जगमोहन मल्होत्रा ​​का जन्म 1927 में पाकिस्तान के हाफिजाबाद में हुआ था और वह देश के विभाजन के बाद दिल्ली आ गए थे और उसके बाद वह दिल्ली में कई अहम पदों पर रहे और उन्होंने दिल्ली में चुनाव भी लड़ा।

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पर्यटन मंत्री भी रहे जगमोहन

जगमोहन (Jagmohan) ने जम्मू-कश्मीर के दो बार राज्यपाल रहे। पहले 1984 से 89 और फिर जनवरी से मई 1990 तक वह राज्य के राज्यपाल रहे। इसके बाद 1996 में पहली बार लोकसभा के लिए भी चुने गए और शहरी विकास और पर्यटन मंत्री भी रहे। उन्हें 1971 में पद्म श्री, 1977 में पद्म भूषण और 2016 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।