झारखंड में आईएएस अफसर जगा रहे हैं छात्रों और अभिभावकों में शिक्षा का दीपक

राज्य के लातेहार के उपायुक्त (डीसी) और 2010 बैच के आईएएस अधिकारी अबू इमरान इस जिले के उपायुक्त बनने से पहले यहां पर अनुमंडल अधिकारी (एसडीओ) भी रह चुके हैं।

झारखंड में आईएएस अफसर जगा रहे हैं छात्रों और अभिभावकों में शिक्षा का दीपक

रांची। आमतौर पर सरकारी अफसरों को सरकारी कार्यो से ही फुर्सत नहीं मिलती, लेकिन झारखंड में भारतीय प्रशासनिक सेवा अफसर ने इन दिनों अभिभावकों और छात्रों के बीच शिक्षा की ललक जगाने के लिए अनोखी पहल की है। आईएएस अफसर अबू इमरान स्वयं न केवल सुदूरवर्ती क्षेत्रों के स्कूलों में जाकर कुछ घंटे छात्रों को पढ़ा रहे हैं बल्कि गांवों में पहुंचकर अभिभावकों को शिक्षा की उपयोगिता को बताते हुए उन्हें बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित भी करते हैं।

राज्य के लातेहार के उपायुक्त (डीसी) और 2010 बैच के आईएएस अधिकारी अबू इमरान इस जिले के उपायुक्त बनने से पहले यहां पर अनुमंडल अधिकारी (एसडीओ) भी रह चुके हैं। ऐसे में वे लातेहार से पूर्व परिचित थे। आईएएस इमरान जब यहां उपायुक्त बनकर आए तब उनकी नजर यहां के सुदूरवर्ती क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ी।

अबू इमरान कहते हैं मुझे स्कूल, कॉलेजों में बच्चों को पढ़ाने की आदत रही है। आमतौर पर सुदूरवर्ती क्षेत्रों में शिक्षा को लेकर जागरूकता की कमी है और लोगों को कोई प्रेरित भी नहीं करता है। वहीं जब कोई अफसर इन गांवों के स्कूलों में स्वयं पढ़ाने जाता है तथा उन बच्चों के अभिभावकों से मिलता है, तो उनमें भी शिक्षा के प्रति ललक बढ़ती है और वे शिक्षा को लेकर जागरूक होते हैं।

कभी नावगढ़ को नक्सलियों का गढ़ समझा जाता था और अब उपायुक्त अबू इमरान अपनी पत्नी जबीन फातिमा के साथ पहुंचकर यहां शिक्षा के प्रति ललक जगा रहे हैं।  उपायुक्त अपनी पत्नी के साथ इंटर व मैट्रिक के बच्चों की क्लास ली एवं जीवन में सफलता के मूलमंत्र दिए। कहा जाता है कि कभी इन इलाकों में बंदूकें गरजा करती थीं, लेकिन उपायुक्त व उनकी पत्नी ने विद्यालय पहुंच कर बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए कलम एवं डायरी दी एवं जीवन में कभी पढ़ाई या रोजगार में शार्टकट नहीं अपनाने की बात कही।

अबू इमरान मानते हैं कि स्कूलों में कई समस्याएं हैं, लेकिन बच्चों के बेंच पर बैठकर उनसे समस्याओं की जानकारी लेकर छोटी-छोटी समस्याओं का पता चल जाता है, जिसे आम लोगों की पहल से सुलझाया जा सकता है। इमरान ने कहा कि कोरोना के दौर में जब स्कूलों में ताले लगे थे, तब यूट्यूब 'ज्ञान कोरा लातेहार' प्रारंभ करवाया गया था। इस चैनल पर अनुभवी और योग्य शिक्षकों से पाठ्यक्रमों के हल करवाकर विषयों को डाला गया, जिसका लाभ यहां के छात्रों को खूब हुआ। वह बताते हैं कि कई स्कूलों में छात्र विषयों के शिक्षक नहीं होने का भी रोना रोते हैं, लेकिन आज सोशल साइटों से कई विषयों की जानकारी मौजूद और इसे छात्रों को देने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि समस्याएं हैं, लेकिन इसे कहकर तो छोड़ा नहीं जा सकता। इसके समाधान के लिए हम सब भी तो कोशिश कर सकते हैं। बहरहाल, ग्रामीण भी उपायुक्त की इस पहल की सराहना करते हैं। नवागढ़ के मदन प्रसाद कहते हैं कि उपायुक्त की इस अनोखी पहल का परिणाम है कि स्कूलों में शिक्षक समय पर आने लगे हैं और बच्चे भी स्कूल जा रहे हैं।