Jitin Prasad Joined BJP:'कमल' थामते ही जितिन प्रसाद को नए घर में मिले पुराने कांग्रेस साथी, कम होगा अकेलापन

Jitin Prasad Joined BJP:जितिन प्रसाद के चचेरे भाई जयेश प्रसाद से राजनीतिक दूरी रही है। जितिन कांग्रेस का झंडा उठाते थे, तब जयेश भाजपा का। लेकिन बीते पंचायत चुनाव में मनमाने प्रत्याशी को लड़ाने के कारण भाजपा ने जयेश को पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

Jitin Prasad Joined BJP:'कमल' थामते ही जितिन प्रसाद को नए घर में मिले पुराने कांग्रेस साथी, कम होगा अकेलापन

Jitin Prasad Joined BJP:फिलहाल कांग्रेस के पूर्व नेता दो दिन पहले ही भाजपा में शामिल हो गए हैं। भाजपा ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए जितिन प्रसाद को पार्टी में शामिल किया है। लेकिन अब जितिन प्रसाद को नए घर में भी पुराने साथी का साथ मिल गया है। क्योंकि शाहजहांपुर जिले के तीन विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी सियासत की शुरूआत जितिन प्रसाद के परिवार से जुड़कर की थी और कांग्रेस में लंबे समय तक रहे। मगर समय के साथ ही इन नेताओं ने कांग्रेस का दामन छोड़ा और भाजपा में में शामिल हो गए।

लिहाजा नए घर में जितिन नए रिश्तेदारों से अंजान नहीं है। ये तीनों विधायक पिछले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गए थे। वर्ष 2017 से लेकर मंगलवार तक इनकी जितिन से दलगत दूरी बनी रही। बुधवार को उनके भाजपा में आने के बाद सबसे पहले इन तीनों विधायकों ने बयान जारी कर स्वागत किया।

सबसे बात शुरू करते हैं पुवायां से मौजूदा भाजपा विधायक चेतराम की। जिनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि कांग्रेस  की रही। उन्होंने जितिन प्रसाद के पिता जितेंद्र प्रसाद के साथ रहकर राजनीति शुरू की थी। वर्ष 1985 से लगातार चार बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक बनते रहे। जितेंद्र प्रसाद के निधन के बाद बेटे जितिन प्रसाद से उनकी सियासी जोड़ी बनी। वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव भी कांग्रेस के टिकट से लड़े थे, मगर हार गए। इसके बाद वर्ष 2017 में वे भाजपा में शामिल हो गए।

वहीं ददरौल से भाजपा विधायक मानवेंद्र प्रताप सिंह ने भी जितेंद्र प्रसाद के साथ रहकर कांग्रेस की राजनीति शुरू की थी। उनके करीबी होने के कारण 14 साल तक लगातार कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रहे थे। बाद में जितिन प्रसाद के करीबी लोगों में उनकी गिनती की जाने लगी। मगर, जिले में कांग्रेस की खराब स्थिति देख मानवेंद्र प्रताप सिंह ने अपना राजनीतिक भविष्य दूसरे दलों में तलाशना शुरू कर दिया। साल में 2016 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बसपा ज्वाइन की। लेकिन यहां वह ज्यादा दिन नहीं रहे और अगले ही साल भाजपा में चले गए। भाजपा से उन्हें विधायकी का टिकट मिला और विधायक बन गए।

इसके अला्वा वीरेंद्र प्रताप सिंह मुन्ना ने भी जितिन के पिता के साथ सियासती जमीन बनानी शुरू की थी। उनके परिवार के खास होने के कारण वर्ष 1991, 1993 में तिलहर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत गए। इसके बाद वर्ष 1998 और 2002 में भी कांग्रेस से विधायक रहे। इसके बाद क्षेत्र में कांग्रेस की जमीन दरकती गई, लेकिन मुन्ना ने जितिन प्रसाद के परिवार का साथ नहीं छोड़ा। इस बीच उनके बेटे वीर विक्रम सिंह सक्रिय राजनीति में आए, मगर कांग्रेस में भविष्य नहीं दिख रहा था। इस वजह से पिछले विधानसभा चुनाव से पहले मुन्ना व उनके बेटे भाजपा में शामिल हुए। वीर विक्रम को मीरानपुर कटरा से टिकट मिला और चुनाव जीत गए।

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जितिन के चचेरे भाई जयेश प्रसाद जा सकते हैं किसी अन्य दल में

कहा जा रहा है कि जितिन प्रसाद के चचेरे भाई जयेश प्रसाद से राजनीतिक दूरी रही है। जितिन कांग्रेस का झंडा उठाते थे, तब जयेश भाजपा का। लेकिन बीते पंचायत चुनाव में मनमाने प्रत्याशी को लड़ाने के कारण भाजपा ने जयेश को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। जिसके बाद माना जा रहा है कि कांग्रेस और अन्य दल उन्हें शामिल कर सकते हैं। ताकि प्रसाद परिवार में सेंध लगाई जा सके।