Narasimha Rao Birthday:गांधी परिवार ने नहीं दिया सम्मान और दक्षिण में खत्म हो गई कांग्रेस की सियासत

Narasimha Rao Birthday:गांधी परिवार ने नहीं दिया सम्मान और दक्षिण में खत्म हो गई कांग्रेस की सियासत
Narasimha Rao

Narasimha Rao Birthday:आज पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव(Narasimha Rao) का जन्म दिन है और आज तेलंगाना  की राजधानी में उनकी एक बड़ी मूर्ति का उदघाटन राज्य की चंद्रशेखर राव सरकार करने जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में राज्य सरकार उनके नाम पर एक नया जिला बना सकती है। जिसके जरिए वह राज्य में कांग्रेस को सियासी तौर पर पीछे धकेल सकते हैं। वहीं नरसिम्हा राव कांग्रेस के वो नेता हैं, जिसे गांधी परिवार ने कभी सम्मान नहीं दिया। यहां तक कि उनके निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में नहीं होने दिया और उनके परिवार के लोगों को तेलंगाना में जाकर उनका अंतिम संस्कार किया।

असल में देश में आर्थिक सुधारों का बड़ा श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को दिया जाता है। भले ही कांग्रेस पार्टी इसका श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को देती हो। नरसिम्हा राव, जब देश में आर्थिक सुधार हुए उस वक्त देश के प्रधानमंत्री थे जबकि मनमोहन सिंह वित्त मंत्री। लिहाजा अगर श्रेय मनमोहन सिंह को दिया जाता है तो उनसे ज्यादा श्रेय नरसिम्हा राव को मिलना चाहिए। क्योंकि उन्होंने ही देश में इन सुधारों को लागू किया। वहीं नरसिम्हा राव अपने कार्यकाल के दौरान राव ने कई ऐतिहासिक फैसले लिए ताकि देश गरीबी से बाहर आ सके। बता दें कि वह एक ऐसा दौर था जब देश को विदेशों में भी अपना सोना गिरवी रखना पड़ता था। हालात ये थे कि देश को चलाने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं था। इसके बाद राव ने घरेलू बाजार खोला था, जो उस समय आलोचना का शिकार था, लेकिन आज जिसके कारण हम शीर्ष देशों में हैं।

दूरदर्शी ने नरसिम्हा राव

असल में 90 के दशक में जब नरसिम्हा राव ने देश की कमान अपने हाथ में ली थी, उस वक्त सिर्फ 2500 करोड़ का रिजर्व था, जो मुश्किल से 3 महीने चला होगा। लिहाजा उन्हें कड़े फैसले लिए और विपक्षी दलों ने उनके इन फैसलों की आलोचना भी की। लेकिन नरसिम्हा राव ने उदारीकरण के प्रयास जारी रखे। 

घोटालों का भी लगा दाग

असल में अपने उदारीकरण के फैसले के बाद नरसिम्हा राव विपक्षी दलों के निशाने पर आ गए थे और इस दौरान देश में घोटाले भी हुए। लिहाजा नरसिम्हा राव के कार्यकाल पर दाग भी लगे। 

नरसिम्हा राव थे 17 भाषाओं के जानकार

नरसिम्हा राव कई भाषाओं के जानकार भी थे। ये कहा जाता है कि वह 17 भाषाओं को जानते थे। भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, स्पेनिश, जर्मन, ग्रीक, लैटिन, फारसी और फ्रेंच भाषाएं भी हैं। अब तक देश का कोई भी प्रधानमंत्री इतनी भाषाएं नहीं जानता।

कांग्रेस ने नरसिम्हा राव को नहीं दिया सम्मान

देश में बड़े फैसले लेकर देश को आर्थिक रूप से मजबूत करने वाले नरसिम्हा राव को कांग्रेस पार्टी में ही सम्मान नहीं मिला। कांग्रेस की कमान सोनिया गांधी के हाथ में आने के बाद कांग्रेस पार्टी ने उनसे दूरी बना ली। नरसिम्हा राव ने खुद 10 जनपथ जाना लगभग बंद कर दिया था। यही नहीं 2004 में राव की मौत के बाद उनके शव को कांग्रेस के दफ्तर में नहीं रखा गया और ना ही कोई कार्यक्रम किया गया। कहा ये भी जाता है कि कांग्रेस की जिद पर भी उनका अंतिम संस्कार तेलंगाना(तत्कालीन आंध्र प्रदेश) में किया गया। इसके पीछे गांधी परिवार की भूमिका मानी जाती है। 

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आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में खत्म हो गई है कांग्रेस की सियासत

नरसिम्हा राव को सम्मान न दिए जाने का कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। आंध्र प्रदेश हो या फिर  तेलंगाना , इन दोनों राज्यों में कांग्रेस अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है। नरसिम्हा राव का जन्म करीमनगर में हुआ था जो अब तेलंगाना में है। लिहाजा राज्य की चंद्रशेखर राव सरकार ने राज्य में नरसिम्हा राव को पूरा सम्मान दिया है। भले ही इसके सियासी कारण हों।  के चंद्रशेखर राव (K Chandrasekhar Rao) ने नरसिम्हा राव की बेटी को राज्य में एमएलसी नियुक्त किया है और आज ही नरसिम्हा राव की 16 फीट की मूर्ति का उद्घाटन होने वाला है। वहीं बताया जा रहा है कि राज्य में एक जिला आने वाले समय में नरसिम्हा राव के नाम पर बनाया जाने वाला है।