उत्तर भारत में फिलहाल ठंड से राहत नहीं , पारा गिर सकता है

मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में ठंड से कोई खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। राजस्थान में मध्य प्रदेश हरियाणा पंजाब समेत अधिकांश मैदानी इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है।

उत्तर भारत में फिलहाल ठंड से राहत नहीं , पारा गिर सकता है
उत्तर भारत में फिलहाल ठंड से राहत नहीं , पारा गिर सकता है

नई दिल्ली। जनवरी का महीना खत्म हो रहा है, लेकिन ठंड थमने का नाम नहीं ले रही है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में ठंड से कोई खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब समेत अधिकांश मैदानी इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। राजस्थान के माउंट आबू एक बार फिर कड़ाके की ठंड में लौट आए हैं। न्यूनतम तापमान माइनस 4 डिग्री तक पहुंच गया है।

मौसम विभाग के अनुसार चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में घना कोहरा और शीतलहर चलने की संभावना है। उत्तर राजस्थान, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी घना कोहरा छाने की संभावना है। पूर्वोत्तर के असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में भी घना कोहरा देखने को मिल रहा है। हिमाचल में कभी धूप तो कभी बादल छाए रहते हैं। पहाड़ों पर अच्छी बर्फबारी हो रही है। जनवरी में अब तक चार वेस्टर्न डिवाइड आ चुके हैं । मौसम का चक्र बदलने से स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। मौसम विभाग ने बताया कि इस बार दिसंबर में वेस्टर्न डिस्टरबेंस कमजोर रहा।

यही वजह है कि दिसंबर का औसत तापमान सामान्य से 5 डिग्री अधिक रहा। बीते दिन का अधिकतम तापमान 17.7 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से तीन डिग्री कम है। वही न्यूनतम तापमान 11 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को आसमान साफ रह सकता है। सुबह कोहरा छा सकता है। दिन का अधिकतम तापमान 18 और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री रह सकता है। हरियाणा में पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं ने फिर ठंड बढ़ा दी है। बीती रात हिसार में पारा 4.2 डिग्री और नारनौल में 4.3 डिग्री पर आ गया। यह सामान्य से 3 डिग्री कम है।

सुबह से ही गहरा कोहरा छाया रहा। इससे अंबाला और हिसार में दृश्यता 200 मीटर आंकी गई। रोहतक में दिन का तापमान शीतलहर के कारण 16.7 डिग्री रहा, जो सामान्य से 4 डिग्री कम है। मौसम विभाग के अनुसार 29 जनवरी तक सुबह कोहरा छा सकता है। अगले तीन दिनों में रात का तापमान दो से तीन डिग्री और कम हो सकता है। एक बार फिर पाला पड़ सकता है। शीतलहर भी चल सकती है।