Sidhu Punjab Congress Sardar:नवजोत सिंह सिद्धू को होगी कल ताजपोशी, जानें कैसा रहा क्रिकेट से सियासत का सफर

Sidhu Punjab Congress Sardar:सीएम अमरिंदर सिंह पिछले लंबे समय से नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) से खफा नजर आते हैं। आइए जानते हैं किक्रेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू के बारे में...

Sidhu Punjab Congress Sardar:नवजोत सिंह सिद्धू को होगी कल ताजपोशी, जानें कैसा रहा क्रिकेट से सियासत का सफर

 Sidhu Punjab Congress Sardar:शुक्रवार का दिन पंजाब कांग्रेस के लिए काफी अहम होगा। क्योंकि कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू कल प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठेंगे और इस मौके पर राज्य के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह भी रहेंगे। असल में पंजाब में चली आ रही घमासान के बीच कांग्रेस आलाकमान के लिए एक बड़ी खबर है। क्योंकि अगले साल राज्य में चुनाव होने हैं और सियासी घमासान खत्म होने बाद इस विवाद को निपटाने में आगे आए गांधी परिवार ने राहत की सांस ली है। फिलहाल सिद्धू की असली परीक्षा राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव हैं और माना जा रहा है कि चुनाव के बाद सिद्धू राज्य में सीएम हो सकते हैं। हालांकि राज्य में चुनाव सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में लड़ा जाएगा।

असल में क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) और सीएम अमरिंदर सिंह (Captain Amrinder Singh) के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही थी। कांग्रेस पार्टी (Congress Party) की अंतरकलह को सुलझाने के लिए कांग्रेस हाईकमान को दखलअंदाजी करनी पड़ी थी। फिलहाल कांग्रेस में सबकुछ ठीक हो जाने के बाद आइए जानते है पंजाब (Punjab) में सरकार किसी की भी हो लेकिन राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले नवजोत सिंह सिद्धू के बारे में...   

सिद्धू का जन्म और सियासी सफर

कांग्रेस नेता और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू का जन्म पंजाब (Punjab) प्रांत के पटियाला (Patiala) जिले में हुआ था। नवजोत सिंह 1983 से 1999 तक क्रिकेट के शानदार खिलाड़ी थे। वहीं क्रिकेट से सन्यास लेने के बाद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और उन्हें बीजेपी ने लोकसभा का टिकट दिया था। क्रिकेट के मैदान की तरह उन्होंने राजनीति में खुलकर हाथ आजमाया और 2004 में भाजपा के टिकट पर अमृतसर (Amritsar) लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद वह फिर सांसद चुने गए। लेकिन 2017 में उन्होंने बीजेपी का दामन छोड़ दिया था और कांग्रेस में शामिल हो गए थे। सिद्धू को राजनीति में लाने का श्रेय भाजपा के दिवंगत नेता अरूण जेटली को जाता है।

जेली भी जा चुके हैं सिद्धू

सिद्धू पर एक व्यक्ति की गैर इरादतन हत्या के आरोप में मुकदमा चला और वह जेल भी गए थे। जिसके बाद अदालत ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई। उन्होंने तत्काल लोकसभा (Loksabha)  की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट द्वारा निचली अदालत की सजा पर रोक लगाने के बाद, उन्होंने फिर से उसी सीट से चुनाव लड़ा और कांग्रेस उम्मीदवार और पंजाब के वित्त मंत्री सुरिंदर सिंगला (Surinder Singla) को सीधे मुकाबले में 77626 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया।

भाजपा से दिया इस्तीफा

वहीं साल 2009 के चुनाव में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ओम प्रकाश सोनी को 6858 वोटों से हराकर अमृतसर की सीट पर दूसरी बार विजय हासिल की। और तब से लेकर आज तक वे अमृतसर की लोकसभा सीट से जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हालांकि भाजपा ने 2014 के संसदीय चुनाव में उन्हें अमृतसर से नहीं उतारने का निर्णय लिया और पार्टी ने मंत्री अरुण जेटली को वहां से मैदान में उतारा था लेकिन वह अमरिंदर सिंह से चुनाव हार गये थे। इसके बाद से सिद्धू भाजपा आलाकमान से नाराज चल रहे थे और आए दिन अपनी बयानबाजी से चर्चा में रहते थे। पंजाब की राजनीति में बड़ी भूमिका न मिलने से नाराज होकर साल 2016 में सिद्धू ने भाजपा छोड़ने का अपना इस्तीफा पार्टी प्रमुख अमित शाह को भेज दिया था। 

कांग्रेस मंत्रिमंडल से दिया था इस्तीफा

पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू 2017 में कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद उन्हें पार्टी की तरफ से प्रमुख जिम्मेदारी देते हुए मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। लेकिन पीएम इमरान खान के आमंत्रण पर पाकिस्तान में एक कार्यक्रम में शामिल होने पर उनकी ही पार्टी के नेताओं ने सिद्धू से इस्तीफे की मांग कर दी थी। पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच काफी समय से तनातनी भी चल रही थी। साल 2019 में  कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। 

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वहीं कैप्टन और सिद्धू के बीच विवाद निपटाने को बनाई गई थी कमेटी 

बता दें कि सीएम अमरिंदर सिंह और सिद्धू एक दूसरे के खिलाफ खुलकर सामने आ चुके थे और दोनों एक दूसरे पर कई राजनैतिक आरोप लगा रहे थे।। अधिकतर मौकों पर सीएम अमरिंदर सिंह अपने ही मंत्री सिद्धू से असहमत और खफा नजर आते थे। जिसके चलते अब इस खींचतान को खत्म करने के लिए बनाई गई तीन सदस्यों वाली केंद्रीय कमेटी सक्रिय हो गई और इसके बाद सिद्धू की कांग्रेस आलाकमान के साथ मुलाकात हुई। जिसके बाद आलाकमान ने सिद्धू के प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति पर मोहर लगाई।

सिद्धू को मिला था प्रियंका गांधी का साथ

असल में नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का बड़ा हाथ माना जाता है। कहा जाता है कि प्रियंका के कहने पर ही सिद्धू को पंजाब की कमान दी गई। क्योंकि एक बार तो राहुल गांधी ने सिद्धू से मिलने से भी मना कर दिया था। इसके बाद प्रियंका गांधी ने सिद्धू से मुलाकात की और उसके बाद प्रियंका और राहुल गांधी ने सिद्धू से मुलाकात की। यहीं से सिद्धू को जीत मिलनी शुरू हो गई और इसके बाद सीएम  कैप्टन अमरिंदर सिंह के लाख चाहने के बावजूद कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धू को पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया।