केरल में राह आसान नहीं है कांग्रेस की, सीटों के बंटवारे पर फंस सकता है पेंच

केरल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ की लगभग सभी पार्टियां अधिक सीटों की मांग कर रही हैं। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग 30 से अधिक सीटों का दावा कर रही है।

केरल में राह आसान नहीं है कांग्रेस की, सीटों के बंटवारे पर फंस सकता है पेंच

नई दिल्ली। केरल में सत्ता की वापसी का सपना देख रही कांग्रेस पार्टी की राह आसान नहीं है। सत्ता में वापसी से पहले उसे अपने सहयोगी दलों से जूझना पड़ेगा। वहीं अगर सीटों का बंटवारा आसानी से होता है तो ये कांग्रेस के लिेए बड़ी जीत होगी। क्योंकि राज्य में कांग्रेस को सत्ता में लौटने की उम्मीद है। क्योंकि उसका स्थानीय निकाय चुनाव में प्रदर्शन अच्छा रहा है। असल में बिहार विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। केरल सहित सभी चुनावी राज्यों में सहयोगी अधिक सीटों के लिए दबाव बना रहे हैं। इसके पीछे सहयोगी दलों के तर्क हैं कि स्ट्राइक रेट कांग्रेस से बेहतर है, इसलिए सहयोगी दलों को विधानसभा चुनाव में अधिक सीटें मिलनी चाहिए।

कांग्रेस की मुश्किल बढ़ा रहे हैं छोटे दल

केरल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ की लगभग सभी पार्टियां अधिक सीटों की मांग कर रही हैं। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग 30 से अधिक सीटों का दावा कर रही है। जबकि वर्ष 2016 में 23 सीटों पर चुनाव लड़ा गया था। हालांकि उसका प्रदर्शन कांग्रेस से ज्यादा अच्छा था। वहीं आईयूएमएल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में हमारा प्रदर्शन कांग्रेस की तुलना में काफी बेहतर था। एक महीने पहले हुए स्थानीय निकाय चुनावों में IUML की स्थिति भी बेहतर थी।

वहीं यूडीएफ में सीटों को फिर से आवंटित करने के लिए कांग्रेस के दबाव का एक कारण केरल कांग्रेस (मणि) और जनता दल का यूडीएफ से अलग होना है। इन दोनों पार्टियों ने पिछले चुनाव में 22 सीटों पर चुनाव लड़ा था।

कांग्रेस 87 सीटों पर लड़ा चुनाव और 22 पर जीत

पिछले विधानसभा चुनाव ने राज्य की 87 सीटों पर चुनाव लड़ा था। लेकिन पार्टी केवल 22 सीटें जीत पाई। पार्टी का स्ट्राइक रेट सिर्फ 25 प्रतिशत था।  जबकि सहयोगी दलों का प्रदर्शन कांग्रेस से बेहतर रहा। लिहाजा कांग्रेस पर सीटों के बंटवारे को लेकर जबरदस्त दबाव है।