उत्तराखंड: त्रिवेन्द्र सरकार ने खेला पहाड़ी कार्ड, गैरसैंण में होगा बजट सत्र

चार मार्च को त्रिवेंद्र सरकार राज्य का बजट पेश करेगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री को कुंभ मेले के दिशानिर्देश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है। अब कुंभ का एसओपी जल्द ही जारी किया जाएगा।

उत्तराखंड: त्रिवेन्द्र सरकार ने खेला पहाड़ी कार्ड, गैरसैंण में होगा बजट सत्र
उत्तराखंड: त्रिवेन्द्र सरकार ने खेला पहाड़ी कार्ड, गैरसैंण में होगा बजट सत्र

देहरादून। राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल की बैठक हुई। इस दौरान चार महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक ने कहा कि विधानसभा सत्र 1 मार्च से 10 मार्च तक ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में आयोजित किया जाएगा।

वहीं, 4 मार्च को त्रिवेंद्र सरकार राज्य का बजट पेश करेगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री को कुंभ मेले के दिशानिर्देश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है। अब कुंभ का एसओपी जल्द ही जारी किया जाएगा।

ये निर्णय मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए

1- स्वच्छ भारत मिशन में जिला स्तर पर गठित समितियों में संशोधन किया गया है। समितियों में नामित सदस्यों के रूप में सांसद और विधायक होंगे।

2- 97 पोस्ट जल जीवन मिशन पर सहमत हुए।

3- उत्तराखंड अग्निशमन सेवा आपातकालीन सेवा अधीनस्थ अधिकारी कर्मचारी सेवा नियम में दो संशोधन किए गए।

4- उत्तराखंड पुलिस इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर सर्विस रूल्स में भी संशोधन किया गया।

कुंभ की तैयारियों को लेकर सरकार से संत हैं नाराज

उधर अखिल भारतीय श्रीपंच रामानंदिया खाकी अखाड़ा के महंत मोहनदास ने कहा है कि राज्य सरकार को कुंभ मेले की उपस्थिति के बारे में संतों के साथ बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर बैरागी कैंप क्षेत्रों में जल्द ही बुनियादी सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गई तो संत आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

पत्रकारों से बात करते हुए, उन्होंने कहा कि करोड़ों भक्तों और भारतीय संस्कृति के विश्वास का सबसे बड़ा त्योहार कुंभ मेला 12 साल बाद होता है। भक्तों की आशाएं सनातन संस्कृति से जुड़ी हैं। ऐसे में सरकार को ध्यान रखना चाहिए कि वह भक्तों की भावना को ठेस न पहुंचाए।

श्रीमंत मोहनदास ने मेला प्रशासन पर बैरागी कैंप क्षेत्र की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लाखों की संख्या में कुंभ मेले में बैरागी संत देश भर से हरिद्वार आते हैं। उनके लिए व्यवस्था करना सरकार की जिम्मेदारी है।