Voices of Rebellion:राजस्थान की बढ़ती बगावत को रोकने को एक कदम आगे बढ़े सीएम गहलोत

Voices of Rebellion:मंत्रिपरिषद की बैठक (council of ministers meeting) में मंत्रियों के बीच मतभेद के बाद कांग्रेस में सियासी हलचल है। इस बीच बैठक की खबर सामने आने पर सीएम अशोक गहलोत ने भी नाराजगी जताई है।

Voices of Rebellion:राजस्थान की बढ़ती बगावत को रोकने को एक कदम आगे बढ़े सीएम गहलोत

Voices of Rebellion: राजस्थान में को गहलोत कैबिनेट की बैठक (council of ministers meeting) में काफी गहमागहमी रही। गहलोत सरकार के मंत्री इस बैठक में आपस में लड़ते (fighting each other) रहे। इस दौरान उन्होंने नौकरशाहों की कार्यशैली (working style of bureaucrats) को लेकर भी अपनी बातों को रखा। मंत्री शांति धारीवाल और गोविंद सिंह डोटासरा के बीच हुई बात एक-दूसरे को देखने की धमकी तक पहुंच गई। धारीवाल और डोटासरा की लड़ाई उनके स्टेटस को लेकर है। शांति धारीवाल सरकार में वरिष्ठ मंत्री हैं और गहलोत के बाद उनका नाम नंबर दो के रूप में लिया जाता है।

दूसरी ओर गोविंद सिंह डोटासरा सरकार में राज्यमंत्री हैं, लेकिन प्रदेश कांग्रेस प्रमुख (state congress chief) की कुर्सी मिलने के बाद ताकतवर हो गए हैं। यहीं से विवाद शुरू हो गया। धारीवाल सहित सरकार के कई दिग्गज मंत्री कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में डोटासरा को पचा नहीं पा रहे हैं और तकरार और असहयोग की प्रक्रिया जारी है। कल मंत्रिपरिषद की बैठक (council of ministers meeting) में लंबे समय से चल रही तकरार तूफान के रूप में भडक़ उठी।

इस तरह का असहयोग

सरकार के कई मंत्री संगठन में डोटासरा का सहयोग नहीं कर रहे हैं और पार्टी के अभियानों और कार्यक्रमों (campaigns and programs) में हिस्सा नहीं लेते हैं। इसको लेकर मीडिया में सवाल उठते रहते हैं और पार्टी की किरकिरी भी हो रही है। बीते दिनों पार्टी ने सोशल मीडिया पर महंगाई के खिलाफ अभियान चलाया था, जिससे कई मंत्रियों और विधायकों (ministers and legislators) ने दूरी बनाए रखी।

इस को लेकर खबर मीडिया की सुर्खियां बन गई। इसके साथ ही पार्टी ने मुफ्त सार्वभौमिक टीकाकरण को लेकर कल सोशल मीडिया पर स्पीक-अप अभियान चलाया था। इस राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी अपने पोस्ट किए, लेकिन राज्य सरकार के करीब 8 मंत्रियों ने इससे दूरी बनाए रखी।

जबकि सीएम गहलोत ने खुद सभी लोगों से इस अभियान से जुडऩे का आह्वान किया था। डोटासरा वरिष्ठ मंत्रियों, विधायकों और पदाधिकारियों (Senior minist ers, legislators and office-bearers) के इस असहयोग को लेकर परेशान और नाराज हैं। 
 

कल मंत्रिपरिषद की बैठक (council of ministers meeting) में हुई बहस में डोटासरा ने कहा था कि कार्यक्रमों का फैसला राष्ट्रीय स्तर से किया जा रहा है। उन्होंने बैठक में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल (General Secretary KC Venugopal) द्वारा जारी परिपत्र को भी पढक़र सुनाया।

ऐसे में चार जून को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों को राज्यपाल और डीसीसी अध्यक्षों को ज्ञापन जिलाधिकारियों को सौंपने की मांग की गई है। इस ज्ञापन को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। दूसरी ओर मामले को लेकर डैमेज कंट्रोल की कवायद भी शुरू हो गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीएम गहलोत ने दोनों मंत्रियों से बैठक के बाद ही देर रात दोनों मंत्रियों से फोन पर बात कर कहा कि मामले को आगे न बढ़ाया जाए। बताया जा रहा है कि बाहर बैठक का मामला उजागर होने पर भी सीएम ने नाराजगी जताई है।

बैठक में काफी गहमागहमी रही

बैठक में न केवल मंत्री शांति धारीवाल और गोविंद सिंह डोटासरा के बीच विवाद हुआ, बल्कि मंत्री परसादीलाल मीणा और प्रताप सिंह खाचरियावास के बीच गतिरोध भी बना रहा। पिछले दिनों जयपुर में अंतिम संस्कार (Funeral) में बड़ी संख्या में शामिल होने के मामले में मंत्री परसादीलाल मीणा ने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी हो, उस पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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उधर, मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि विधायक व्यवस्था का हिस्सा हैं। विधायक-सांसदों को कई बार लोगों को समझाने के लिए भीड़ के पास जाना पड़ता है और रफीक खान भी भीड़ को समझाने के लिए वहां से चले गए। इसलिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करना गलत है। बैठक में मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और अशोक चांदना ने भी कलेक्टरों की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जताई। खाचरियावास ने तो यहां तक कहा कि कोरोना काल में जयपुर कलेक्टर अपने कक्ष से बाहर भी नहीं आए।