क्या दिल्ली दरबार में बचेगी त्रिवेन्द्र की कुर्सी, इतिहास तो नहीं है ऐसा बीजेपी का

फिलहाल उत्तराखंड में कुर्सी बचाने के लिए राज्य के सीएम त्रिवेद्र सिंह रावत दिल्ली पहुंच गए हैं और ये बताया जा रहा है कि उन्हें दिल्ली तलब किया गया है। वहीं राज्य भेजी गई कोर टीम ने बीजेपी आलाकमान को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

क्या दिल्ली दरबार में बचेगी त्रिवेन्द्र की कुर्सी,  इतिहास तो नहीं है ऐसा बीजेपी का

नई दिल्ली। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत अपनी कुर्सी को बचाने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं। बताया जा रहा है कि वह बीजेपी आलाकमान से मुलाकात करेंगे। फिलहाल त्रिवेन्द्र सिंह की पूरी कवायद कुर्सी बचाने की है। वहीं अभी तक राज्य में बीजेपी का ये इतिहास नहीं रहा कि अगर आलाकमान ने तय कर लिया कि सीएम हटाना है तो वह अपने फैसले नहीं बदलती है। इससे पहले राज्य में तीन बार सीएम बदले जा चुके हैं। जिन्होंने कुर्सी बचाने के लिए दिल्ली दरबार की भी परिक्रमा की थी और उन्हें दिल्ली में इसकी कोई सफलता नहीं मिली।

फिलहाल उत्तराखंड में कुर्सी बचाने के लिए राज्य के सीएम त्रिवेद्र सिंह रावत दिल्ली पहुंच गए हैं और ये बताया जा रहा है कि उन्हें दिल्ली तलब किया गया है। वहीं राज्य भेजी गई कोर टीम ने बीजेपी आलाकमान को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। फिलहाल चर्चा ये है कि बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा आज त्रिवेन्द्र सिंह रावत से मिलकर उन्हें उनका रिपोर्ट कार्ड बता सकते हैं। क्योंकि राज्य से पर्यवेक्षकों को जो फीडबैक मिला है। वह त्रिवेन्द्र के खिलाफ जाता है। क्योंकि जिस तरह से त्रिवेन्द्र पर्यवेक्षकों की बैठक से बाहर निकले, उसको लेकर पर्यवेक्षक भी नाराज हैं।  वहीं सीएम त्रिवेन्द्र का दिल्ली अचानक पहुंचना काफी सवाल उठा रहा है। जिसके लिए बताया जा रहा है कि पार्टी कुछ बड़े फैसले कर सकती है।

गौरतलब है कि शनिवार को देहरादून में कई घंटे की चली और इस बैठक में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, टिहरी माला से लोकसभा सांसद राज्यलक्ष्मी शाह, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, नैनीताल से लोकसभा सांसद अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के साथ संगठन के महत्वपूर्ण नेता भी उपस्थित थे। वहीं इस बैठक में 40 से ज्यादा विधायक थे और विधायकों ने अपनी परेशानी केन्द्रीय पर्यवेक्षकों को बताई। 


विधायकों से पूछा त्रिवेद्र का विकल्प

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जो जानकारी आ रही है। उसके मुताबिक देहरादून पहुंचे केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने विधायकों से त्रिवेन्द्र सिंह रावत के विकल्पों पर भी राय मांगी। वहीं ज्यादातर विधायकों ने त्रिवेन्द्र सिंह को लेकर नाराजगी जताई और कुछ नामों का भी जिक्र किया। 

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष कर रहे हैं नेतृत्व परिवर्तन से इंकार

उधर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत राज्य में किसी भी तरह के बदलाव से इंकार कर रहे हैं। हालांकि ये एक तरह से फेस ऑफ की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। 

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दिल्ली से लेकर देहरादून तक छाई सियासी गर्मी

फिलहाल त्रिवेन्द्र के दिल्ली पहुंचने के साथ ही राज्य में सियासी गर्मी छा गई है। राज्य में तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन कोई भी खुलकर नहीं बोल रहा है।

उत्तराखंड में तीन बार बदले जा चुके हैं सीएम

हालांकि उत्तराखंड में बीजेपी का रिकार्ड है कि वह सीएम चुनाव से पहले बदल देती है। अन्तरिम सरकार के दौर में भी नित्यानन्द स्वामी को हटा के भगत सिंह कोश्यारी को सीएम बनाया गया था जबकि बीसी खंडूड़ी की जगह निशंक और फिर निशंक की जगह फिर बीसी को सीएम बनाकर बीजेपी ने ये प्रयोग किए थे। वहीं कुछ ऐसा इस बार भी हो रहा है। बीजेपी आलाकमान कोई बड़ा दांव खेल सकता है। ताकि फिर से राज्य की सत्ता पर काबिज हुआ जा सके।

कौन हैं सीएम पद के दावेदार

फिलहाल राज्य में सीएम पद के चार दावेदार माने जा रहे हैं। पहला सीएम त्रिवेन्द्र खुद, दूसरा बीजेपी के राज्यसभा सांसद और मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी, तीसरा केन्द्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और चौथे सतपाल महाराज। लेकिन सीएम को लेकर इतना तय है कि जो भी नाम तय किया जाएगा वह दिल्ली में तय किया जाएगा। वहीं ज्यादातर विधायक और सांसद भी राज्य में सीएम को लेकर बदलाव चाहते हैं और इसके बारे में पर्यवेक्षकों ने आलाकमान को रिपोर्ट सौंप दी है।